
बद्रीप्रसादअसाटी
298 days ago
🚩🕉️🚩🕉️🚩🕉️🚩🕉️🚩🕉️ *🚩🕉️कार्तिक पूर्णिमा 2025: 05 नवंबर 2025 बुधवार* 🚩🕉️🚩🕉️🚩🕉️🚩🕉️🚩🕉️ *🚩🕉️कार्तिक पूर्णिमा हिंदू धर्म में एक अत्यंत महत्वपूर्ण पर्व है, जिसे 'त्रिपुरारी पूर्णिमा' या 'देव दीपावली' के नाम से भी जाना जाता है। यह पर्व कार्तिक मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है और इसे स्नान, दान और दीपदान के लिए बहुत शुभ माना जाता है।* *🚩🕉️मान्यता है कि इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने से सभी पापों का नाश होता है और अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।* *🚩🕉️कार्तिक पूर्णिमा 2025: तिथि और शुभ समय* *🚩🕉️वर्ष 2025 में, कार्तिक पूर्णिमा का पर्व 5 नवंबर 2025, बुधवार को मनाया जाएगा। चूँकि हिंदू धर्म में उदया तिथि को प्रधानता दी जाती है, इसलिए पूर्णिमा का मुख्य स्नान, दान और पूजा 5 नवंबर को ही किया जाएगा।* *🚩🕉️पूर्णिमा तिथि का प्रारंभ - 4 नवंबर 2025, रात्रि 10:36 बजे* *🚩🕉️पूर्णिमा तिथि की समाप्ति - 5 नवंबर 2025, शाम 06:48 बजे* *🚩🕉️स्नान का शुभ मुहूर्त (ब्रह्म मुहूर्त) - 5 नवंबर 2025, प्रातः 04:52 बजे से 05:44 बजे तक* *🚩🕉️सुबह की पूजा का मुहूर्त - 5 नवंबर 2025, प्रातः 07:58 बजे से 09:20 बजे तक* *🚩🕉️प्रदोष काल पूजा का मुहूर्त (देव दीपावली) | 5 नवंबर 2025, शाम 05:15 बजे से 06:05 बजे तक* *🚩🕉️कार्तिक पूर्णिमा का महत्व* *🚩🕉️कार्तिक पूर्णिमा का धार्मिक और आध्यात्मिक दोनों ही दृष्टियों से विशेष महत्व है।* *🚩🕉️त्रिपुरारी पूर्णिमा: पौराणिक कथाओं के अनुसार, इसी दिन भगवान शिव ने त्रिपुरासुर नामक शक्तिशाली राक्षस का वध किया था, जिसने देवताओं को त्रस्त कर रखा था। इस विजय की खुशी में देवताओं ने दीपावली मनाई थी, इसीलिए इसे 'त्रिपुरारी पूर्णिमा' भी कहा जाता है।* *🚩🕉️देव दीपावली: इस दिन देवतागण स्वर्ग से उतरकर काशी (वाराणसी) में दीपावली मनाते हैं। इसलिए काशी के घाटों पर लाखों दीपक जलाए जाते हैं, जिसे 'देव दीपावली' कहते हैं।* *🚩🕉️गंगा स्नान और दान: कार्तिक पूर्णिमा के दिन गंगा, यमुना या किसी भी पवित्र नदी में स्नान करने का महत्व बताया गया है। माना जाता है कि ऐसा करने से व्यक्ति के जन्म-जन्मांतर के पाप नष्ट हो जाते हैं। स्नान के बाद अपनी सामर्थ्य के अनुसार अन्न, वस्त्र, और धन का दान करना अत्यंत शुभ फलदायी होता है।* *🚩🕉️भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी की पूजा: यह दिन भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी की पूजा के लिए भी विशेष माना जाता है। इस दिन उनकी पूजा करने से घर में सुख-शांति, समृद्धि और धन-वैभव आता है।* *🚩🕉️कार्तिक पूर्णिमा की पूजा विधि* *🚩🕉️कार्तिक पूर्णिमा के दिन निम्नलिखित विधि से पूजा करने का विधान है:* *🚩🕉️पवित्र स्नान: सूर्योदय से पूर्व उठकर किसी पवित्र नदी, सरोवर या घर पर ही पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें।* *🚩🕉️व्रत और संकल्प: स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें और मन में व्रत या पूजा का संकल्प लें।* *🚩🕉️सूर्य को अर्घ्य: उगते सूर्य को जल में रोली (कुमकुम) और अक्षत मिलाकर अर्घ्य दें।* *🚩🕉️दीपदान: मंदिर में या नदी के घाट पर दीपदान करें। 365 बत्तियाँ वाला दीपक जलाना बहुत शुभ माना जाता है।* *🚩🕉️भगवान विष्णु और लक्ष्मी की पूजा: घर के मंदिर में भगवान विष्णु (सत्यनारायण रूप) और देवी लक्ष्मी की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। उन्हें रोली, चावल, फूल, फल, नैवेद्य (भोग) अर्पित करें।* *🚩🕉️कथा पाठ: श्री सत्यनारायण व्रत कथा का पाठ करें या सुनें।* *🚩🕉️तुलसी पूजा: तुलसी के पौधे की पूजा करें और उसके पास दीपक जलाएं।* *🚩🕉️दान: अपनी क्षमता के अनुसार गरीब या जरूरतमंद लोगों को भोजन, वस्त्र या धन का दान करें।* *🚩🕉️चंद्र दर्शन: शाम को चंद्रमा के दर्शन करें और उन्हें अर्घ्य दें।* *🚩🕉️दीपदान का विशेष महत्व* *🚩🕉️कार्तिक पूर्णिमा पर दीपदान को सबसे महत्वपूर्ण कर्म माना गया है। दीपदान न केवल अंधकार को दूर करता है, बल्कि यह जीवन में ज्ञान, प्रकाश और सकारात्मकता लाता है। नदी के जल में दीपक प्रवाहित करना, मंदिर में दीपक जलाना, या घर के मुख्य द्वार पर दीपक जलाना शुभ होता है। इस दिन किए गए दीपदान से भगवान विष्णु और अन्य देवी-देवता अत्यंत प्रसन्न होते हैं और भक्तों को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं।* *🚩🕉️यह पावन पर्व हमें धार्मिक कार्यों, दान और पवित्रता के महत्व को समझाता है, जिससे हमारा जीवन सुख, शांति और समृद्धि से परिपूर्ण हो सके।* 🚩🕉️🚩🕉️🚩🕉️🚩🕉️🚩🕉️

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