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Rama Devi Sahu

146 days ago

जब मन संसार की भागदौड़ से थक जाता है, जब विचारों का शोर आत्मा को बेचैन कर देता है, तब भीतर कहीं एक मौन पुकार उठती है — “शिव…” शिव, जो शब्द नहीं… अनुभव हैं। शिव, जो रूप नहीं… चेतना हैं। जो हिमालय की निस्तब्धता में विराजते हैं, और हर साधक के हृदय में भी उतनी ही गहराई से बसते हैं। ध्यान में बैठे शिव हमें यह सिखाते हैं कि शक्ति शोर में नहीं, शांति में होती है। विजय बाहरी दुनिया को जीतने में नहीं, बल्कि अपने भीतर के अंधकार को मिटाने में होती है। उनकी बंद आँखें यह कहती हैं — “जो भीतर देखता है, वही सत्य को जानता है।” उनका स्थिर आसन यह समझाता है — “जो स्वयं में स्थिर है, वही अडिग है।” जब तुम ध्यान में बैठते हो, तो केवल आँखें बंद मत करो… अपने अहंकार को भी शांत करो, अपने डर को भी समर्पित करो, और अपने हर प्रश्न को शिव के चरणों में रख दो। क्योंकि शिव ही वह शून्य हैं, जहाँ हर चिंता समाप्त हो जाती है… और वही पूर्ण हैं, जहाँ हर उत्तर स्वतः मिल जाता है। 🔱 ध्यान मंत्र: ॐ नमः शिवाय 🌌 जब भी जीवन भारी लगे, बस एक पल रुककर भीतर उतर जाना… वहाँ तुम्हें कोई और नहीं, स्वयं शिव मिलेंगे। 🙏

Comments (1)

Radhe  🌹

Radhe 🌹

Apr 6, 2026

Har Har Mahadev 🌷🙏 Good Night Ji 🙏