
बद्रीप्रसादअसाटी
281 days ago
🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷 *पादपानां भयं वातात् पद्मानां शिशिराद्भयम्।* *पर्वतानां भयं वज्रात् साधूनां दुर्जनाद्भयम्॥* 🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷 *भावार्थ -* जिस प्रकार वृक्षों को आँधी से, कमल को ओस से, पर्वतों को वज्र से भय रहता है उसी प्रकार सज्जनों को दुर्जनों से भय रहता है, क्योंकि सज्जन सदैव धर्म मार्ग पर चलते हैं और दुर्जनों का कोई धर्म नहीं होता। 🪻🪻🪻🪻🪻🪻🪻🪻🪻🪻🪻 *आपका आज का दिन मांगल्य से परिपूर्ण रहे इस शुभकामना के साथ -* *- नारायण दत्त गुरुकुलिया* 🪻🪻🪻🪻🪻🪻🪻🪻🪻🪻🪻 23-11-2025

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