
Rama Devi Sahu
113 days ago
हनुमान चालीसा में ऐसा कौन सा रहस्य छुपा हुआ है जिसे अगर हम अपने जीवन में उतार लें तो जीवन में बहुत तरक्की कर सकते हैं? हम भारत मे रहते है और भारत मे रहकर कोई भी मतलब कोई भी राम एवं रामायण से अनजाना हो ही नही सकता। हनुमान चालीसा से संबंधित इस जिज्ञासा के लिए पहले मैं आपको श्रीराम चरित्र में लिए चलता हूँ कुछ क्षणों के लिए… बाली के भय से बुरी तरह व्याकुल होकर इधर उधर छुपकर सुग्रीव रह रहा था। फिर श्रीराम से मिलवाकर एवं उनसे मैत्री करवा कर किष्किंधा का सम्पूर्ण राज्य दिलवाने वाले एकमात्र निःस्वार्थ भक्त थे श्रीहनुमानजी महाराज। लंका में विभीषण के घर स्वयं जाकर एवं उनको श्रीराम रहस्य सुनाकर पूर्णतः पवित्र कर दिया और अंत मे श्रीहनुमानजी द्वारा सुनाए श्रीराम के यश को हृदय में ध्यान रखकर ही विभीषण रावण की लंका त्यागकर बिना दो बार सोचे श्रीराम की शरण मे आ गए और तुरंत प्रभु ने उन्हें लंका का राज्य प्रदान कर दिया। अशोक वाटिका में राम विरह से आतुर-व्याकुल माँ जानकी के दुःखों का नाश तभी हुआ जब श्रीहनुमानजी ने जाकर उनके चरणों मे प्रणाम करके शुरू से अंत तक श्रीराम कथा सुनायी। इस संवाद के संबल से माँ सीता ने एक मास ऐसे व्यतीत कर लिया जैसे एक क्षण हो। फिर लंका विजय का समाचार भी श्रीहनुमानजी द्वारा ही प्राप्त हुआ जिसके बाद श्रीराम से पुनः मिलन संभव हो सका। अयोध्या वापसी के समय भरत जी को भी ब्राह्मण रूप में जाकर श्रीराम के सम्पूर्ण चरित्र सुनानेऔर प्रभु के आगमन की सूचना देने वाले श्रीहनुमानजी महाराज ही थे ना! जिसके बाद ही भरत जी को श्रीराम का दर्शन प्राप्त हो सका और विरहाग्नि शांत हो पायी। देखिए ये सभी श्रीराम के अत्यंत निकट थे और नित्य साथ रहते थे, पर एक बार विरह हो जाने के बाद सभी को श्रीराम का दर्शन तभी हो सका जब श्रीहनुमानजी ने जाकर प्रभु के चरित्र सुनाए और प्रभु का मार्ग दिखाया। हम भी तो भगवान का अंश है, उन्ही से निकले है। पहले उनमें ही रहते थे पर माया ने ऐसा लपेटा की भगवान से हमारा भी विरह हो गया है। हनुमान चालीसा में भी हम पाठ करते ही है ना: "तुम उपकार सुग्रीवहि कीन्हा राम मिलाय राजपद दीन्हा" और "तुम्हरो मंत्र बिभीषनु माना लंकेस्वर भय सब जग जाना" तुमने ही उपकार करके सुग्रीव को श्रीराम से मिलवा दिया और तुम्हारा ही उपदेश मानकर विभीषण श्रीराम की शरण आया और लंकाधिपति बन गया। कितना सरल सार तत्त्व बता दिया गया है की जैसे ही श्रीहनुमानजी महाराज के दर्शन होंगे वैसे ही तुरंत आप पात्र बन जाएंगे श्रीराम दर्शनों के और फिर तो उसके बाद धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष के साथ साथ सबसे दुर्लभ श्रीराम भक्ति की प्राप्ति हो जाएगी। अब इस सम्पूर्ण आख्यान को सांसारिक जीवन मे देखे: श्रीराम है आत्मा! वो आत्मा जो हमसभी के भीतर है तो सही पर हम उसे ना कभी देख पाते है ना अनुभव ही कर पाते है। श्रीहनुमानजी है साक्षात गुरु! गुरु अपने शिष्य को उसके जीवन का पथ दिखलाता है, उसपर चलना सिखाता है और मार्ग की सारी बाधाओं से अपने शिष्य की रक्षा करते हुए अंत मे उसके परम गंतव्य यानी जीवन के परम लक्ष्य तक हाथ पकड़ कर ले जाता है। अब आप हनुमान चालीसा की इस पंक्ति का स्मरण करे: "जय जय जय हनुमान गोसाँई । कृपा करहु गुरुदेव की नाई ।।" अंतिम पंक्ति है ये हनुमान चालीसा की, इसके बाद तो जो सत बार पाठ कर कोई और फल श्रुति आ जाती है। तो क्यो अंतिम पंक्ति है ये! इसीलिए की सबसे अधिक महत्व रखने वाली पंक्ति है ये! पंक्ति का भावार्थ है: "हे श्रीहनुमानजी महाराज! हम अज्ञानी बच्चों पर कृपा करो और आप हमारे एकमात्र गुरु बनकर हमे अपनी आत्मा अपने श्रीराम के पास ले चलो! आपकी जय हो! आपकी जय हो! आपकी जय हो!" हनुमान चालीसा ने अंत मे ये बता दिया है की जीवन मे बस एक और एक बात हृदय में धार ली जाय तो इस संसार सागर से बेड़ा पार है, इसी बात को जीवन मे उतार लिया जाए तो जीवन मे तो भरपूर तरक्की करेगा ही, जीवन के बाद परलोक जाने पर भी आनंद करेगा… वो बात है की हमारे गुरु है हमारे श्रीहनुमानजी महाराज! बस इस बात को वास्तविक जीवन मे उतार लिया तो फिर कुछ नही करना है, फिर गुरु खड़े है हाथ फैलाए.. थामो उनका हाथ और श्रीराम को पाने की यात्रा शुरू! आप गुरु मानकर हाथ थामो तो सही बस एक बार। श्रीराम जय राम जय जय राम🌺🙏

Comments (4)

Pannalal panchal
May 10, 2026
राम राम जय सीताराम जय हनुमान जी भगवान

सविता
May 9, 2026
Jai ram ji ki 🙏🌹

Rakesh Kumar
May 9, 2026
good morning ji 🙏

My Mandir good by
May 9, 2026
good morning Radhe Radhe ji 👏
