
बद्रीप्रसादअसाटी
307 days ago
*🌳🦚आज की कहानी🦚🌳* *💐💐बुरा वक्त और सीख की किताब*💐💐 एक छोटे से कस्बे में *गुर्वित* नाम का एक युवा रहता था। वह मेहनती था, लेकिन जीवन उसे बार-बार ठोकरें दे रहा था। कभी नौकरी छूट जाती, कभी दोस्त धोखा दे देते, और कभी परिवार में कोई न कोई परेशानी आ जाती। लोग कहते — “गुर्वित का वक्त बहुत खराब चल रहा है।” शुरू में वह इन बातों से टूट गया। लेकिन एक दिन उसके गुरु *शेखर सर* ने उससे कहा — > “बुरा वक्त तो सबका आता है बेटा, लेकिन ध्यान रखना... तुम्हारी वजह से किसी और का बुरा वक्त न आ जाए।” ये बात गुर्वित के दिल में घर कर गई। उसने तय किया कि चाहे जो भी हो, वह दूसरों के साथ बुरा नहीं करेगा। धीरे-धीरे उसने समझा — *दूसरों को गिराकर कोई खुद ऊँचा नहीं उठ सकता।* गुर्वित ने फिर एक बार कोशिश की — इंटरव्यू दिए, रिजेक्ट हुआ; बिज़नेस शुरू किया, घाटा हुआ। लेकिन हर बार वह खुद से कहता — > “मैं कभी नहीं हारता। या तो मैं जीतता हूँ या फिर सीखता हूँ।” धीरे-धीरे उसकी सोच बदल गई। अब असफलता उसे डराती नहीं थी, बल्कि सिखाती थी। एक दिन उसकी मुलाकात पुराने स्कूल के एक अध्यापक से हुई। शिक्षक बोले — > “तुम किताबों के सामने झुक जाओ बेटा, ये तुम्हारे सामने पूरी दुनिया को झुका देंगी।” गुर्वित ने ये बात गंभीरता से ली। उसने पढ़ाई को अपनी ताकत बना लिया। ज्ञान उसका हथियार बन गया और वही ज्ञान उसकी असली पूंजी भी। गुर्वित अब समझदार हो चुका था। लेकिन उसने देखा कि उसके आसपास कई लोग *रावण* की तरह हैं — झूठ, लालच, ईर्ष्या और दिखावा। वह सोचने लगा — > “रावण के दस चेहरे थे, मगर स्पष्ट दिखाई देते थे… आज के रावण तो मुस्कराहट के पीछे छिपे हुए हैं।” अब वह लोगों को उनके चेहरों से नहीं, उनके कर्मों से परखने लगा। एक दिन उसके ऑफिस में कुछ लोग गलत कामों में शामिल निकले — रिश्वत और धोखाधड़ी। जब उसने विरोध किया, तो वे बोले — “भाई, इस दुनिया में ऐसे ही चलता है, न्याय ढूंढने मत निकलो।” गुर्वित मुस्कराया और बोला — > “आप उस दुनिया में कभी न्याय नहीं पाएंगे, जहाँ अपराधी ही नियम बनाते हैं।” वह नौकरी छोड़कर खुद का ईमानदार काम शुरू कर देता है। कम कमाई होती है, लेकिन आत्मसम्मान ऊँचा होता है। धीरे-धीरे जब उसकी सफलता दिखने लगी, तो वही लोग उसके पीछे बातें करने लगे। किसी ने कहा — “गुर्वित घमंडी हो गया।” किसी ने कहा — “किस्मत से चला है।” गुर्वित बस मुस्करा कर सोचता — > “जब तक कोई मुँह पर बात न कहे, यही समझना चाहिए कि उसने कुछ नहीं कहा।” एक दिन उसका छोटा भाई बहुत उदास था — किसी ने उसे बुरा कहा था। गुर्वित ने हँसते हुए कहा — > “परेशान मत हुआ कर सबकी बातों से... कुछ लोग पैदा ही बकवास करने के लिए होते हैं।” भाई की हँसी लौट आई, और उसी दिन गुर्वित को अहसास हुआ कि उसने जीवन का असली सबक सीख लिया है। समय के साथ गुर्वित सफल हो गया — लेकिन उससे भी ज़्यादा, वह *संवेदनशील, ईमानदार और शांत इंसान* बन गया। लोग आज भी कहते हैं — “गुर्वित बहुत भाग्यशाली है।” पर कोई नहीं जानता कि उसने अपने बुरे वक्त को *सीख में बदल दिया था* और यही उसकी असली जीत थी। *💐शिक्षा:💐* बुरा वक्त इंसान को तोड़ता नहीं, बल्कि तराशता है। अगर आप हार से सीखते हैं, और दूसरों के लिए भला सोचते है,तो एक दिन पूरी दुनिया आपके सामने झुकेगी। *सदैव प्रसन्न रहिए 🙏🏻* *जो प्राप्त है, पर्याप्त है।।*

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