
Rama Devi Sahu
88 days ago
क्या हमने भगवान कृष्ण को केवल उत्सव बनाकर छोड़ दिया… या उनके धर्म, नीति और विराट स्वरूप को भुला दिया? आज कृष्ण जी का नाम आते ही लोगों को बस यही दिखाई देता है— माखन चोर… रासलीला… होली… बांसुरी… झूले में बैठे लड्डू गोपाल… लेकिन पुराणों, महाभारत और गीता का कृष्ण इससे कहीं अधिक विराट है। वह कृष्ण— जिनका जन्म कारागार में हुआ… जिसके जन्म से ही अत्याचारियों के सिंहासन हिल गए… जिसने बचपन से मृत्यु तक अधर्म के विरुद्ध संघर्ष किया… क्या वह केवल नृत्य और प्रेम का प्रतीक हो सकता है? नहीं। शास्त्रों में कृष्ण को केवल प्रेम का नहीं, धर्म की रक्षा और अधर्म के विनाश का अवतार बताया गया है। में स्वयं भगवान कहते हैं— “यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत। अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्॥” अर्थात— जब-जब धर्म की हानि और अधर्म की वृद्धि होती है, तब-तब मैं अवतार लेता हूँ। और आगे— “परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम्। धर्मसंस्थापनार्थाय संभवामि युगे युगे॥” अर्थात— सज्जनों की रक्षा, दुष्टों के विनाश और धर्म की स्थापना के लिए मैं युग-युग में प्रकट होता हूँ। सोचिए… यदि कृष्ण केवल रासलीला के लिए आए होते, तो क्या महाभारत जैसा धर्मयुद्ध होता? क्या वे अत्याचारी का वध करते? क्या वे की सौ गलतियाँ क्षमा करने के बाद सुदर्शन चक्र चलाते? नहीं। कृष्ण का जीवन यह सिखाता है कि— धर्म केवल मंदिरों की घंटियों में नहीं रहता, धर्म अन्याय के विरुद्ध खड़े होने में भी होता है। महाभारत में कृष्ण ने केवल उपदेश नहीं दिए… उन्होंने धर्म बचाने के लिए राजनीति भी की। उन्होंने भीष्म को हराने की नीति बनाई… द्रोणाचार्य को रोकने का उपाय बताया… कर्ण की कमजोरी पहचानी… और दुर्योधन के अहंकार को उसी के विरुद्ध उपयोग किया। क्योंकि शास्त्र कहते हैं— “शठे शाठ्यं समाचरेत्।” अर्थात— धोखेबाज के साथ वैसी ही नीति आवश्यक हो सकती है। कृष्ण जानते थे— जब सामने अधर्म हो, तो केवल सीधी सरलता पर्याप्त नहीं होती। इसीलिए उन्होंने अर्जुन से कहा— “क्लैब्यं मा स्म गमः पार्थ।” अर्थात— हे अर्जुन, कायरता को मत अपनाओ। लेकिन आज का समाज कृष्ण के इस रूप से डरता है। क्योंकि आज लोग ऐसा कृष्ण चाहते हैं— जो बस प्रेम की बातें करे, जो बस उत्सव दे, जो बस भावुकता दे। वह कृष्ण नहीं, जो कर्तव्य याद दिलाए… जो मोह तोड़े… जो युद्ध के लिए खड़ा करे। और आज का युवा? जिस उम्र में कृष्ण धर्म की रक्षा कर रहे थे, आज का युवा सोशल मीडिया, ट्रेंड, फेक लाइफस्टाइल, लव और ब्रेकअप में उलझा हुआ है। जिस गीता ने अर्जुन जैसे योद्धा को खड़ा कर दिया, उसी गीता को आज “पुरानी बातें” कहा जाता है। लेकिन घंटों तक स्क्रीन स्क्रॉल करना कठिन नहीं लगता। शास्त्रों में कहा गया है— “उद्धरेदात्मनात्मानं नात्मानमवसादयेत्।” अर्थात— मनुष्य को स्वयं अपना उत्थान करना चाहिए, स्वयं को गिराना नहीं चाहिए। लेकिन आज का मनुष्य स्वयं ही अपने मन, समय और शक्ति को नष्ट कर रहा है। महाभारत केवल पुरानी कथा नहीं… आज का समाज भी उसी दिशा में खड़ा दिखाई देता है। लेकिन प्रश्न वही है— क्या आज कोई कृष्ण को सुनना चाहता है? क्योंकि कृष्ण केवल यह नहीं कहते— “प्रेम करो।” वे यह भी कहते हैं— “स्वधर्मे निधनं श्रेयः।” अर्थात— अपने धर्म और कर्तव्य के लिए संघर्ष करना ही श्रेष्ठ है। कृष्ण का सम्पूर्ण स्वरूप दो ध्रुवों का संतुलन है— एक हाथ में बांसुरी… दूसरे में सुदर्शन चक्र। एक ओर राधा का प्रेम… दूसरी ओर कुरुक्षेत्र का धर्मयुद्ध। यदि हम केवल उनकी मुस्कान देखेंगे… तो उनका संदेश खो देंगे। और शायद यही हमारे समय का सबसे बड़ा दुर्भाग्य है— हम कृष्ण की पूजा तो करते हैं… लेकिन गीता का साहस, महाभारत की नीति और धर्म के लिए खड़े होने की शक्ति जीवन में उतारने से डरते हैं। ॥ हरि: ॐ ॥ जय श्री कृष्णा 🙏

Comments (10)

Rama Devi Sahu
Jun 3, 2026
🙏‼️ Vasudeva Sutam Deva Kansa Chanur Mardonm, Devaki Paramanand Krishnam Vande Jagat Guru 🙏 Radhey Radhey ❤️ Jai Shree Krishna 🌹 Shubha Ratri Vishram Ji 🌹🌹

Rama Devi Sahu
Jun 3, 2026
Facebook se Upload karti hu...

Rama Devi Sahu
Jun 3, 2026
Mai bhi Ekdum thik hu... Radhey Radhey ❤️ Shubha Ratri Jii 🌹🌹

hasu jadav
Jun 3, 2026
shri Krishnam vande Jagat Guru 🙏

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Jun 3, 2026
mera matlb post kha se upload karte ho

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Jun 3, 2026
ji hum theek h aap batao kese ho

Rama Devi Sahu
Jun 3, 2026
Ji Shukriya 🌹 Meri Profile me hai...

Rama Devi Sahu
Jun 3, 2026
🌹🌹 Radhey Radhey ❤️ Jai Shree Krishna 🌹 Keise Ho Aap...?

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Jun 3, 2026
kha se laate ho achi achhi post ?

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Jun 3, 2026
bhut khoob 👌 Radhe Radhe 🙏
