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ताहि मारि मारुतसुत बीरा। बारिधि पार गयउ मतिधीरा।। तहाँ जाइ देखी बन सोभा। गुंजत चंचरीक मधु लोभा ।। 3 ।। भावार्थः- पवनपुत्र धीरबुद्धि वीर श्री हनुमान् जी उसको मारकर समुन्द्र के पार गए । वहाँ जाकर उन्होने वन की शोभा देखी । मधु ( पुष्प रस ) के लोभ से भौरे गुंजार कर रहे थे ।। 3 ।। श्री राम चंद्र सरकार की जय 🚩🙏जय श्री राम🙏🚩 ☕🌻सुप्रभात🌻☕

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