
Srikumar महाराज🇮🇳☸️
97 days ago
जब भगवान श्रीराम अपनी लीला पूर्ण कर साकेत धाम (अपने परम धाम) को प्रस्थान करने लगे, तब उनके साथ अयोध्या के सभी जीव—मनुष्य, पशु-पक्षी, यहाँ तक कि पेड़-पौधे और पर्वत भी चल पड़े। इस भीड़ में वह धोबी भी शामिल था जिसने जगत जननी माता सीता की निंदा की थी। आश्चर्य की बात यह थी कि स्वयं भगवान श्रीराम ने उस धोबी का हाथ पकड़ रखा था और उसे अपने साथ लिए जा रहे थे। ।। साकेत का द्वार बंद हुआ ।। जैसे ही सभी ने साकेत धाम में प्रवेश करना चाहा, द्वार खुल गया। परन्तु, जैसे ही उस निंदक धोबी ने कदम बढ़ाया, साकेत का द्वार स्वतः बंद हो गया! साकेत द्वार ने प्रभु से कहा— "हे महाराज! आप भले ही इसका हाथ पकड़ लें, किन्तु यह जगत जननी माँ सीता का निंदक है। यह इतना बड़ा पापी है कि यह साकेत में प्रवेश नहीं कर सकता।" ।। देवताओं ने फेरा मुंह ।। आकाश मार्ग से सभी देवी-देवता यह दृश्य देख रहे थे। भगवान ने जब अन्य लोकों की ओर देखा, तो सभी देवता घबरा गए: ब्रह्मा जी हाथ हिलाकर बोले— "प्रभु! इस पापी के लिए मेरे ब्रह्मलोक में कोई स्थान नहीं है।" इन्द्र घबराए— "महाराज! मेरे इन्द्रलोक में भी इसके लिए जगह नहीं है।" ध्रुव जी ने सोचा कि इसके पाप के बोझ से कहीं मेरा ध्रुवलोक ही न गिर पड़े, उन्होंने भी मना कर दिया। ।। यमराज का भय ।। अंत में यमराज की बारी आई। वे भी घबराकर उतावली वाणी में बोले— "महाराज! यह इतना बड़ा पापी है कि इसके लिए मेरी यमपुरी (नरक) में भी कोई जगह नहीं है। मैं इसे नहीं रख सकता।" ।। प्रभु की असीम करुणा ।। धोबी यह देखकर अत्यंत घबरा गया कि उसकी निंदा के कारण उसे नर्क में भी जगह नहीं मिल रही। भगवान श्रीराम खड़े-खड़े मुस्कुराते रहे। उन्होंने धोबी की घबराहट देखी और उसे संकेत से आश्वस्त किया— "तुम घबराओ मत।" तब करुणानिधान प्रभु श्रीराम ने उस धोबी के लिए एक नए, अलग 'साकेत' का निर्माण किया। गोस्वामी तुलसीदास जी लिखते हैं: सिय निँदक अघ ओघ नसाए । लोक बिसोक बनाइ बसाए ।। (अर्थात: सीता जी के निंदक के पापों के समूह का नाश करके, उन्होंने उसे शोक रहित लोक बनाकर उसमें बसाया।) सार: ऐसा माना जाता है कि वह धोबी आज भी उस अलग साकेत में अकेला है, जहाँ न कोई देव है, न भगवान। यह कथा सिखाती है कि भगवान या माता की निंदा करने वाले के लिए तीनों लोकों में, यहाँ तक कि यमपुरी में भी स्थान नहीं है। फिर भी, शरणागत वत्सल प्रभु श्रीराम अपनी शरण में आए हुए का हाथ कभी नहीं छोड़ते, भले ही पूरा ब्रह्मांड उसे ठुकरा दे। जय सियाराम! 🙏🙏

Comments (4)

Srikumar महाराज🇮🇳☸️
May 31, 2026
नमस्ते, सूचना न मिलने के कारण देर से जवाब देने के लिए क्षमा चाहता हूँ। आपकी मदद के लिए आभारी हूँ। 🙏

Srikumar महाराज🇮🇳☸️
May 31, 2026
🙏 Ram Krishna Hari bol 🙏 dhanyawad appka

Rama Devi Sahu
May 25, 2026
*"विचार" चाहे कितने भी "उत्तम" क्यों ना हो... वह "सार्थक" तभी माने जाते हैं, जब उनकी झलक "व्यवहार" में दिखती है...!!!!* *जीवन के कुछ संबंध ऐसे होते हैं..!* *जो किसी पद या प्रतिष्ठा* *के मोहताज नहीं होते..!* *वे स्नेह और विश्वास की* *बुनियाद पर टिके होते हैं..!!* 🙏🙏🌹🌹🙏🙏

Rama Devi Sahu
May 25, 2026
Jai Shree Ram 🙏 Jai Siya Ram 🙏🌹🌹
