
प्रभा त्रिपाठी
429 days ago
राम।।🍁 *..क्रियासे प्रेम की प्राप्ति नहीं होगी..*✨ *श्रोता--* जप करनेसे भगवान् में प्रेम, भक्ति प्राप्त होकर कल्याण हो जायगा क्या? *स्वामीजी--* जपरूपी क्रियासे प्रेमकी प्राप्ति नहीं होगी। *जपके साथ भाव रखो तो प्रेम होगा।* क्रियाका जप बहुत कर लोगे तो भी प्रेम नहीं होगा। भावपूर्वक 'हे नाथ! हे नाथ!' कहते हुए मानो साक्षात् भगवान् दीखें और उनके चरणोंमें प्रेमभाव करके जप करो तो प्रेम प्राप्त होगा, केवल क्रियासे नहीं होगा। क्रिया और पदार्थ प्रकृति है। प्रकृतिके सहारेसे भगवान् में प्रेम नहीं होता। प्रकृतिके त्यागसे प्रेम होता है। *भगवान् मेरे हैं-इस मेरेपनसे, अपनेपनसे प्रेम होता है। अपनेपनमें शक्ति है, क्रियामें शक्ति नहीं है।* हाँ, न करनेसे तो करना अच्छा है- *'अकरणात् मन्दकरणं श्रेयः'*; परन्तु प्रेम प्रकट करनेकी ताकत क्रियामें नहीं है। आप प्रकृतिसे ऊँचे उठकर भगवान् में प्रेम करो। *'हे नाथ! हे नाथ!' कहते ही हृदय द्रवित हो जाय। तब प्रेम होगा। क्रिया और पदार्थके जोरसे प्रेम नहीं होगा।* 'माँ-माँ' कहनेमें ताकत नहीं है, प्रत्युत 'मेरी माँ है' - इस मेरेपनमें ताकत है। इसी तरह 'मेरे भगवान् हैं' - इसमें ताकत है। जैसे, मीराबाईने कहा है- *'मेरे तो गिरधर गोपाल, दूसरो न कोई'।* *राम ! राम !! राम !!!* परम् श्रद्धेय स्वामी जी श्रीरामसुखदास जी महाराज, पुस्तक- *ईश्वर अंस जीव अबिनासी* पृष्ठ १४५
Comments (1)

Rama Devi Sahu
Jun 27, 2025
Jai Shree Ram 🙏 Jai Siya Ram 🙏🌹🌹
