
Rama Devi Sahu
3 days ago
बद्रीनाथ धाम(धरती का बैकुंठ) जनपद चमोली देवभूमि उत्तराखंड बद्रीनाथ धाम को धरती का बैकुंठ माना जाता है, जो हिंदू धर्म के पवित्रतम चार धामों और मुख्य वैष्णव तीर्थों में सर्वोच्च स्थान रखता है। यह पवित्र मंदिर उत्तराखंड के चमोली जिले में अलकनंदा नदी के तट पर स्थित है। भगवान विष्णु को समर्पित यह धाम अपनी अलौकिक आध्यात्मिक ऊर्जा और हिमालय की अचेत कर देने वाली सुंदर वादियों के लिए विश्व प्रसिद्ध है। शास्त्रों के अनुसार, बद्रीनाथ धाम सत्ययुग का सबसे प्रधान तीर्थ है। मान्यता है कि यहां भगवान विष्णु ने नर और नारायण रूप में लोक कल्याण के लिए कठिन तपस्या की थी। तपस्या के दौरान जब भगवान विष्णु पर हिमपात होने लगा, तब माता लक्ष्मी ने बदरी (बेर) के वृक्ष का रूप धारण कर उनकी रक्षा की थी। इस समर्पण से प्रसन्न होकर नारायण ने इस क्षेत्र को 'बद्रिकाश्रम' का नाम दिया। मंदिर के गर्भगृह में स्थापित भगवान बद्रीविशाल की मूर्ति शालिग्राम शिला से निर्मित है। यह मूर्ति किसी मानव द्वारा नहीं बनाई गई, बल्कि स्वयं भू (प्राकृतिक रूप से प्रकट) है, जिसे आदि गुरु शंकराचार्य ने नारद कुंड से निकालकर स्थापित किया था। मान्यता है कि जो व्यक्ति बद्रीनाथ के दर्शन कर लेता है, उसे जीवन-मरण के चक्र से मुक्ति मिल जाती है। इसी कारण इसे 'धरती का बैकुंठ' कहा जाता है।
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