
Rama Devi Sahu
442 days ago
🙏❤️ Jai Bharat ❤️🙏 भारत की शक्ति अहमदाबाद विमान हादसा: जहाँ लोगों ने खुद को नहीं, दूसरों को पहले रखा 12 जून की सुबह जब विमान क्रैश हुआ, तो हर तरफ सिर्फ आग, धुआँ और चीख-पुकार थी। लेकिन इस अफरा-तफरी में भी कुछ लोग ऐसे थे जो जान बचाने के लिए अपनी जान की परवाह किए बिना कूद पड़े। “मेरे घर के बाहर धमाके की आवाज़ आई। मैं दोड़ा और देखा तो चारों तरफ धुआँ था। किसी ने कहा कि हॉस्टल में छात्र फँसे हैं… बस फिर क्या था, मैं दौड़ पड़ा,” — यह कहना है 19 साल के विनीत का, जिसने दो डॉक्टरों को कंधे पर उठाकर बाहर निकाला। विनीत अकेले नहीं था। 20-25 स्थानीय लोग, जिनमें रिक्शा चालक, दुकानदार, महिला गृहिणियाँ और कॉलेज के छात्र शामिल थे, बिना किसी सरकारी मदद की प्रतीक्षा किए खुद मौके पर पहुँच गए। घायलों को रिक्शा, बाइक और निजी गाड़ियों से अस्पताल तक पहुँचाया गया। “हमें नहीं पता था कि डॉक्टर हैं या स्टाफ, बस इंसान थे — और दर्द में थे। जो कर सकते थे, किया,” — एक स्थानीय महिला जिसने घायलों को पानी पिलाया और सिर पर पट्टी बांधी। • 9 रेसिडेंट डॉक्टरों को रिक्शा से तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया, जबकि बाकी घायलों को बाद में भी लगातार पहुँचाया जाता रहा। • कई युवाओं ने घायलों को अपने कंधों पर उठाकर बाहर निकाला, क्योंकि स्ट्रेचर और एंबुलेंस आने में देर हो रही थी। • स्थानीय महिलाओं ने अपने घरों से चादरें और पानी की बोतलें लाकर घायलों को दीं। • एक दुकानवाले ने अपने फ्रिज का सारा ठंडा पानी बाहर रख दिया, ताकि किसी को ज़रूरत हो तो बिना पूछे ले जाए। • एक ऑटो चालक ने 4 चक्कर लगातार अस्पताल के लगाए — बिना एक रुपया लिए। इस तरह का समर्पण न कोई सरकारी आदेश से आया, न मीडिया की नजरों के लिए। यह तो वह स्वाभाविक इंसानियत थी, जो केवल संकट के समय में सामने आती है। यह सिर्फ एक प्लेन क्रैश नहीं था, यह उस भारत की तस्वीर थी *जहां विपत्ति आने पर लोगों ने एकजुट होकर सामना किया* जय भारत🙏🙏❤️
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