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Rama Devi Sahu

115 days ago

🌺🌸 “ठाकुरजी की भाभी” 🌸🌺 ✨✨✨✨✨✨✨✨✨✨ एक लडकी थी जो कृष्ण जी की अनन्य भक्त थी, बचपन से ही कृष्ण भगवान का भजन करती थी, भक्ति करती थी, भक्ति करते-करते बड़ी हो गई, भगवान की कृपा से उसका विवाह भी श्रीधाम वृन्दावन में किसी अच्छे घर में हो गया। विवाह होकर पहली बार वृन्दावन गई, पर नई दुल्हन होने से कही जा न सकी, और मायके चली गई। फिर वो दिन भी आ गया जब उसका पति उसे लेने उसके मायके आया, अपने पति के साथ फिर वृन्दावन पहुँच गई। पहुँचते पहुँचते उसे शाम हो गई, पति वृन्दावन में यमुना किनारे रूक गया। पति ने कहा–‘देखो! शाम का समय है, मैं यमुनाजी में स्नान करके अभी आता हूँ, तुम इस पेड़ के नीचे बैठ जाओ और सामान की देखरेख करना मै थोड़े ही समय में आ जाऊँगा। यही सामने ही हूँ, कुछ लगे तो मुझे आवाज दे देना।’ इतना कहकर पति चला गया, और वह लडकी वहीं बैठ गई। एक हाथ लंबा घूँघट निकाल रखा है, क्योकि गाँव है, ससुराल है और वही बैठ गई, मन ही मन विचार करने लगी–‘देखो! ठाकुरजी की कितनी कृपा है उन्हें मैंने बचपन से भजा और उनकी कृपा से मेरा विवाह भी श्रीधाम वृन्दावन में हो गया। मैं इतने वर्षों से ठाकुरजी को मानती हूँ परन्तु अब तक उनसे कोई रिश्ता नहीं जोड़ा ? फिर सोचती है ठाकुरजी की उम्र क्या होगी ? लगभग १६ वर्ष के होंगे, मेरे पति २० वर्ष के हैं तो उनसे थोड़े से छोटे है, इसलिए मेरे पति के छोटे भाई की तरह हुए, और मेरे देवर की तरह, तो आज से ठाकुरजी मेरे देवर हुए।’ अब तो ठाकुरजी से नया सम्बन्ध जोड़कर बड़ी प्रसन्न हुई और मन ही मन ठाकुरजी से कहने लगी–‘देखो ठाकुर जी ! आज से मैं तुम्हारी भाभी और तुम मेरे देवर हो गए।’ इतना सोच ही रही थी तभी एक १०-१२ वर्ष का बालक आया और उस लडकी से बोला–‘भाभी-भाभी !’ लडकी अचानक अपने भाव से बाहर आई और सोचने लगी वृन्दावन में तो मै नई हूँ ये भाभी कहकर कौन बुला रहा है, नई थी इसलिए घूँघट उठकर नहीं देखा कि गाँव के किसी बड़े-बूढ़े ने देख लिया तो बड़ी बदनामी होगी। अब वह बालक बार-बार कहता पर वह उत्तर न देती बालक पास आया और बोला–‘भाभी ! नेक अपना चेहरा तो देखाय दे।’ वह सोचने लगी–‘अरे ये बालक तो बड़ी जिद कर रहा है, इसलिए कस के घूँघट पकड़कर बैठ गई कि कही घूँघट उठकर देख न ले।’ लेकिन उस बालक ने जबरदस्ती घूँघट उठकर चेहरा देखा और भाग गया। थोड़ी देर में उसका पति आ गया, उसने सारी बात अपने पति से कही। पति ने कहा–‘तुमने मुझे आवाज क्यों नहीं दी ?’ लड़की बोली–‘वह तो इतने में भाग ही गया था।’ पति बोला–‘चिन्ता मत करो, वृन्दावन बहुत बड़ा थोड़े ही है, कभी किसी गली में खेलता मिल गया तो हड्डी पसली एक कर दूँगा फिर कभी ऐसा नहीं कर सकेगा। तुम्हें जहाँ भी दिखे, मुझे जरूर बताना।’ फिर दोनों घर आ गए। कुछ दिन बाद उसकी सास ने अपने बेटे से कहा–‘बेटा ! देख तेरा विवाह हो गया, बहू मायके से भी आ गई, पर तुम दोनों अभी तक बाँकेबिहारीजी के दर्शन के लिए नहीं गए कल जाकर बहू को दर्शन कराकर लाना।’ अगले दिन दोनों पति पत्नी ठाकुरजी के दर्शन के लिए मन्दिर जाते है मन्दिर में बहुत भीड़ थी। लड़का कहने लगा–‘देखो ! तुम स्त्रियों के साथ आगे जाकर दर्शन करो, मैं भी आता हूँ। अब वह आगे गई पर घूँघट नहीं उठाती उसे डर लगता कोई बड़ा बुढ़ा देखेगा तो कहेगा–‘नई बहू घूँघट के बिना घूम रही है।’ बहुत देर हो गई पीछे से पति ने आकर कहा–‘अरी बाबली ! बिहारीजी सामने है, घूँघट काहे नाय खोले, घूँघट नाय खोलेगी तो दर्शन कैसे करेगी।’ उसने अपना घूँघट उठाया और जो बाँकेबिहारीजी की ओर देखा तो बाँकेबिहारीजी कि जगह वही बालक मुस्कुराता हुआ दिखा। उसे देख वह एकदम से चिल्लाने लगी–‘सुनियेजी ! जल्दी आओ-जल्दी आओ !’ पति पीछे से भागा-भागा आया बोला–‘क्या हुआ ?’ लड़की बोली–‘उस दिन जो मुझे भाभी-भाभी कहकर भागा था वह बालक मिल गया।’ पति ने कहा–‘कहाँ है, अभी उसे देखता हूँ ?’ लड़की ठाकुरजी की ओर इशारा करके बोली–‘ये रहा, आपके सामने ही तो है।’ उसके पति ने जो देखा तो अवाक् रह गया और वही मन्दिर में ही अपनी पत्नी के चरणों में गिर पड़ा बोला–‘तुम धन्य हो वास्तव में तुम्हारे हृदय में सच्चा भाव ठाकुरजी के प्रति है, मैं इतने वर्षों से वृन्दावन मै हूँ मुझे आज तक उनके दर्शन नहीं हुए और तेरा भाव इतना उच्च है कि बिहारीजी के तुझे दर्शन हुए।’ 🙏🌺॥जय जय श्री राधे॥🌺🙏

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