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Rama Devi Sahu

426 days ago

🙏‼️ Radhey Radhey ❤️ Jai Shree Krishna ‼️🙏 Dt.29.06.2025 (Sunday) ************************ (((( निर्मोही कृष्ण )))) . एक बार गोपियों ने श्री कृष्ण से कहा- "हे कृष्ण ! हमें अगस्त्य ऋषि को भोग लगाने को जाना है, और ये यमुना जी बीच में पड़ती हैं। अब तुम बताओ हम कैसे जायें ?" . भगवान श्री कृष्ण ने कहा - "जब तुम यमुना जी के पास जाओ तो उनसे कहना कि, हे यमुनाजी, अगर श्री कृष्ण ब्रह्मचारी हैं तो हमें रास्ता दो।" . गोपियाँ हँसने लगी कि, लो ये कृष्ण भी अपने आप को ब्रह्मचारी समझते है, सारा दिन तो हमारे पीछे-पीछे घूमता है, कभी हमारे वस्त्र चुराता है कभी मटकियाँ फोड़ता है। खैर फिर भी हम बोल देंगी। . गोपियाँ यमुना जी के पास जाकर कहती हैं, "हे यमुनाजी ! अगर श्री कृष्ण ब्रह्मचारी हैं तो हमें रास्ता दें।" और गोपियों के कहते ही यमुनाजी ने रास्ता दे दिया। . गोपियाँ तो सन्न रह गई ये क्या हुआ ? कृष्ण और ब्रह्मचारी ? . अब गोपियाँ अगस्त्य ऋषि को भोजन करवा कर वापस आने लगीं तो उन्होंने अगस्त्य ऋषि से कहा- "मुनिवर ! अब हम घर कैसे जायें ? यमुनाजी बीच में हैं।" . अगस्त्य ऋषि ने कहा कि तुम यमुना जी को कहना- "अगर अगस्त्यजी निराहार हैं तो हमें रास्ता दें।" . गोपियाँ मन में सोचने लगी कि अभी हम इतना सारा भोजन लाई सो सब गटक गये और अब अपने आप को निराहार बता रहे हैं ? . गोपियाँ यमुना जी के पास जाकर बोली, "हे यमुनाजी ! अगर अगस्त्य ऋषि निराहार हैं तो हमे रास्ता दें।" यमुनाजी ने उन्हें तुरन्त रास्ता दे दिया। . गोपियाँ आश्चर्य करने लगीं कि जो खाता है वो निराहार कैसे हो सकता है ? और जो दिन रात हमारे पीछे-पीछे फिरता है वो कृष्ण ब्रह्मचारी कैसे हो सकता है ? . इसी उधेड़बुन में गोपियों ने कृष्ण के पास आकर फिर से वही प्रश्न किया। . भगवान श्री कृष्ण ने कहा- "गोपियों मुझे तुमारी देह से कोई लेना देना नहीं है, मैं तो तुम्हारे प्रेम के भाव को देख कर तुम्हारे पीछे आता हूँ। . मैंने कभी वासना के तहत संसार नहीं भोगा मैं तो निर्मोही हूँ। इसीलिए यमुना ने आप को मार्ग दिया।" . तब गोपियाँ बोली - "भगवन् ! मुनिराज ने तो हमारे सामने भोजन ग्रहण किया... . फिर भी वो बोले कि अगत्स्य आजन्म उपवासी हो तो हे यमुना मैया मार्ग दें, और बड़े आश्चर्य की बात है कि यमुना ने मार्ग दे दिया ? . श्री कृष्ण हँसने लगे और बोले- "अगत्स्य आजन्म उपवासी हैं। अगत्स्य मुनि भोजन ग्रहण करने से पहले मुझे भोग लगाते हैं। . उनका भोजन में कोई मोह नहीं होता उनको कतई मन में नहीं होता कि मैं भोजन करूँ या भोजन कर रहा हूँ। . वो तो अपने अन्दर रह रहे मुझे भोजन करा रहे होते हैं, इसलिए वो आजन्म उपवासी हैं। . *जो मुझसे प्रेम करता है मैं उनका सच में ऋणी हूँ ,* मैं तुम सबका ऋणी हूँ , यह सुनकर और परम सत्य को जानकर गोपियाँ श्रीकृष्ण के चरणों में नतमस्तक हो गयीं। . इस कथा में भगवान श्री कृष्ण जो कि भक्तवत्सल हैं, गोपियों के मन चेतन पर पड़े दृष्टि भ्रम को भी दूर किया था। . ~~~~~~~~~~~~~~~~~ *((((((( जय जय श्री राधे )))))))* ~~~~~~~~~~~~~~~~~

Comments (6)

ranjit  chavda

ranjit chavda

Jun 30, 2025

🔔🔔जय श्री कृष्णा 🔔🔔

Deepak  karki

Deepak karki

Jun 29, 2025

🙏🌹जय श्री कृष्ण राधे कृष्णा राधे राधे जी शुभ रात्रि जी 🙏🌹

प्रभा त्रिपाठी

प्रभा त्रिपाठी

Jun 29, 2025

जय श्री राधे राधे राधे राधे 🌹🙏

Anup Kumar Sinha

Anup Kumar Sinha

Jun 29, 2025

जय श्री राधे कृष्ण 🙏🙏

RAKESH SHARMA OM NAMH SHIVAY 🥀🚩

RAKESH SHARMA OM NAMH SHIVAY 🥀🚩

Jun 29, 2025

ॐ नमः शिवाय 🙏🚩

प्रेम कुमार

प्रेम कुमार

Jun 29, 2025

🌹🌹 जय श्री कृष्णा राधे राधे 🌹