
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
2 days ago
23.8.2026 आप जीवन में बहुत सी वस्तुओं को प्राप्त करने की इच्छा करते हैं। उनमें से बहुत सी प्राप्त हो भी जाती हैं, और कुछ नहीं भी हो पाती। *"इसके अतिरिक्त कुछ वस्तुएं या घटनाएं आप नहीं चाहते, फिर भी वे जीवन में हो जाती हैं। कम या अधिक यह स्थिति प्रायः प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में होती है।"* ऐसी स्थिति में आपके जीवन में निराशा उत्पन्न हो सकती है। *"तो ऐसी स्थिति में निराश न हों। उत्साह पूर्वक पुरुषार्थ करते रहें। यदि कोई आपकी मनचाही वस्तु आपको समय पर मिल जाए, तो ठीक है।" "यदि कम मिले, या देर से मिले, या अच्छी क्वालिटी की न मिले, जैसी भी मिले, जब भी मिले, उस वस्तु और उस परिस्थिति को प्रसन्नता से वैसा स्वीकार कर लें।"* *"और जो घटनाएं आप नहीं चाहते, परंतु उन पर आपका कोई नियंत्रण नहीं है। उन्हें आप किसी भी प्रकार से रोक नहीं सकते। तो ऐसी अनचाही घटनाओं का सामना करने के लिए पहले से मानसिक तैयारी कर लें," कि "ऐसा तो होगा ही।" और जब भी होगा, तब हम घबराएंगे नहीं। तब जो भी उपाय होगा, वह करेंगे। उस घटना या परिस्थिति को प्रसन्नता से स्वीकार करेंगे।"* *"यदि आप इस ढंग से तैयारी कर के अपने जीवन को जिएंगे, तो इस बात की गारंटी है, कि आप कभी भी कहीं भी उदास निराश नहीं होंगे। सदा उत्साहित रहेंगे, प्रसन्न रहेंगे, तथा आपका जीवन सफल हो जाएगा।" "वेद आदि शास्त्रों में जीवन जीने का सही तरीका यही बताया गया है।"* ---- *"स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक, निदेशक - दर्शन योग महाविद्यालय, रोजड़, गुजरात."*

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