
बद्रीप्रसादअसाटी
296 days ago
संस्कार और व्यवहार 🌹🌹🌹🌹🌹 परिवारिक वातावरण संस्कार निर्माण करते है । क्योकि माता पिता के रक्त कण ही बार-बार व्यक्ति को प्रभावित कर विवश कर देते है वही आदत के अनुसार जीने के लिए । परिवार के द्वारा मानसिक रूप से बुद्धि-विवेक मे जा कर बिठाया गया था। वही अवश्य अंदर से निकलते रहता है प्रकाश की तरह । कुछ लोग परिवार के संस्कार बाहरी वातावरण के कारण छोड़कर वहां की स्थानीय सभ्यता अपना लेते है 🍁🍁🍁🍁 ।कुछ ऐसे लोग भी है जो पैसे के लिए अपना इमान,धर्म, सत्य, छोड़कर, पैसे ,पद,के लालच मे सारे बेसिक सिद्धांत भूल कर गुलाम होकर जीते है । 🌹🌹🌹 शब्द, भाषा,विचार, रहन-सहन, खान-पान, हमेंशा एक कोने मे छिपकर देखते रहते है ।उस व्यक्ति का असली रूप देखना हो तो उसे क्रोध दिलवा कर देखे । उसका असली चरित्र बिल्कुल अलग नजर आएगा। उसका बनावटी मुखौटा उतर जाएगा । और वह अपने व्यहवार का सही रूप दिखा देगा। कभी-कभार कुछ अपवादस्वरूप कुछ व्यक्तिगत तौर से अपने अंदर के सुधार स्वीकार कर नया उद्देश्य निर्मित कर लेते है । 🍁🌹🍁🌹 संस्कार और व्यवहार निश्चित ही संसार को रहस्यपूर्ण बना देते है । किन्तु अनुवांशिक परम्परा चलती रहती है । मनुष्य अपनी आदतो का गुलाम बन जाता है । जय शनि देव 🙏🍁🙏🍁

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