
Srikumar महाराज🇮🇳☸️
155 days ago
*महोदधि आरती - समुद्र की आरती 🌊* ओड़िशा के स्वर्गद्वार-तट पर प्रत्येक संध्या में होता है यह दिव्य अनुष्ठान, जिसे कहते हैं महोदधि आरती. ‘महोदधि’ का अर्थ है विशाल समुद्र, और इस आरती के दौरान भक्त समुद्र को दीप, मंत्र और श्रद्धा समर्पित करते हैं. सूर्यास्त के बाद मठ-पुजारियों द्वारा उठाया गया घी-दीप, शंखनाद और भजन-मंत्र वहाँ उपस्थित हर हृदय में गूंजते हैं. इसे कभी ‘सामुद्र आरती’ भी कहा गया है, क्योंकि यह सिर्फ नदी या जलराशि की नहीं, समुद्र के समर्पण की भाव-प्रक्रिया है. यह आरती हमें स्मरण कराती है कि प्रकृति केवल दर्शनीय नहीं, बल्कि पूजनीय भी है. समुद्र, नदियाँ, हवाएँ, सिंधु सब में देवत्व वास करता है. *मेरी संस्कृति…मेरा देश…मेरा अभिमान 🚩*
Comments (2)

Srikumar महाराज🇮🇳☸️
Mar 28, 2026
जय जगन्नाथ धन्यवाद 🙏

Rama Devi Sahu
Mar 28, 2026
⚜️प्रभु जगन्नाथ के अपूर्व रूप🙏🏻 ⭕‼️⭕ ⚜️नीलाचल के शिखर से झांकता दिव्य प्रकाश, जग के नाथ, जगन्नाथ, तुम हो हर श्वास का विश्वास। तुम्हारी विशाल आँखों में अनंत ब्रह्मांड समाया, हर भक्त ने तुम्हें अपने हृदय में बसाया।🙏🏻 ✨काले काष्ठ में छिपा उज्ज्वल तेज तुम्हारा, दिखता सरल, पर गहरा है स्वरूप तुम्हारा। न हाथ पूरे, न चरणों का पूरा आकार, फिर भी तुमसे ही चलता सारा संसार। ✨तेरे रूप में छिपा है सृष्टि का हर राज, तू ही है आरंभ, तू ही अंत का साज। मंद-मंद मुस्कान से देते हो आश्रय, हर पीड़ा में बन जाते हो स्नेहिल उपश्रय। ✨रथ पर बैठ जब निकलते हो नगर में, भक्त उमड़ पड़ते हैं प्रेम के सागर में। “जय जगन्नाथ” की गूंज से भर जाता गगन, हर मन झूम उठता, मिट जाता है हर शमन। ✨तुम्हारा अपूर्व रूप समझ से परे है, हर दर्शन में नई लीला खड़ी है। कभी बालक, कभी विश्वरूप विशाल, हर रूप में दिखते हो दया के भंडार। ✨तुम्हारे चरणों में शांति का बसेरा, तुम्हारी कृपा से कटता हर अंधेरा। भक्तों की पुकार तुम तक पहुँचती हर बार, तुम ही हो जीवन का सच्चा आधार। ✨हे प्रभु जगन्नाथ, कर दो ऐसी कृपा अपार, हर हृदय में बसो बनकर प्रेम का सार। तुम्हारा रूप रहे सदा आँखों में बसा, जीवन का हर क्षण बने तुम्हारा ही दासा।🥀🙏🏻
