
श्रुति शर्मा
235 days ago
🪷 #लक्ष्मी #माता के #कमल पर #विराजमान होने के #पीछे की #कथा और #महत्व लक्ष्मी माता का हमेशा कमल के फूल पर विराजमान रहना (जिन्हें पद्मासना कहा जाता है), केवल एक चित्रण नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहन दार्शनिक महत्व छिपा हुआ है। एक प्रचलित पौराणिक कथा इस प्रकार है: कथा: समुद्र मंथन और कमल का जन्म यह कथा समुद्र मंथन से जुड़ी हुई है। * देवताओं और असुरों का मंथन: एक समय, देवताओं (देवों) और असुरों ने मिलकर अमरता प्राप्त करने के लिए क्षीर सागर (दूध के महासागर) का मंथन किया। * रत्नों का प्रकट होना: इस मंथन से कई अद्भुत रत्न, जीव और वस्तुएँ प्रकट हुईं, जैसे कि कामधेनु गाय, ऐरावत हाथी, कल्पवृक्ष, आदि। * लक्ष्मी जी का प्राकट्य: अंत में, साक्षात् देवी लक्ष्मी जी प्रकट हुईं। वे अत्यंत तेजोमय और सौंदर्य से भरपूर थीं। * कमल पर आगमन: जैसे ही देवी लक्ष्मी समुद्र से निकलीं, जल में से एक विशाल, सुंदर और निर्दोष कमल का फूल स्वयं ही प्रकट हुआ। देवी ने उसी कमल के आसन पर स्वयं को स्थापित किया। कमल ने उन्हें जल की अशुद्धता से ऊपर रखते हुए एक शुद्ध और पवित्र स्थान प्रदान किया। * विष्णु जी से विवाह: इसके बाद, देवताओं और ऋषियों ने उनकी पूजा की। देवी लक्ष्मी ने भगवान विष्णु को अपने पति के रूप में स्वीकार किया। दार्शनिक महत्व (महत्वपूर्ण बिंदु) कमल का फूल, कीचड़ (अशुद्धता) में उगता है, लेकिन फिर भी निर्मल, शुद्ध और पवित्र बना रहता है। यह लक्ष्मी माता के कमल पर विराजमान होने का मुख्य आध्यात्मिक कारण है: * निर्लेपता का प्रतीक: कमल का फूल जीवन की मायावी दुनिया (कीचड़) में रहते हुए भी उससे अछूता रहता है। लक्ष्मी माता यही संदेश देती हैं कि धन-संपत्ति (जो संसार की 'कीचड़' के समान मोह पैदा कर सकती है) प्राप्त करने के बाद भी, व्यक्ति को निर्लेप, पवित्र और शुद्ध विचारों वाला रहना चाहिए। * संपत्ति की शुद्धता: कमल धन के शुद्ध उपयोग का प्रतीक है। लक्ष्मी माता हमें सिखाती हैं कि धन का उपयोग करते समय हमेशा पवित्रता, नैतिकता और धर्म का ध्यान रखना चाहिए, ताकि हम धन के मोह में फंसकर दूषित न हो जाएं। * उत्थान और विकास: कमल सूर्योदय के साथ खिलता है। यह आध्यात्मिक उत्थान और अंधेरे (अज्ञान) पर ज्ञान की विजय का प्रतीक भी है। इसलिए, लक्ष्मी माता को कमल पर बैठी (पद्मासना), कमल धारण करने वाली (पद्महस्ता), और कमल के रंग की (पद्मवर्णा) कहा जाता है।


