
Rama Devi Sahu
294 days ago
एक बार की बात है एक बहुत ही पुण्य व्यक्ति अपने परिवार सहित तीर्थ के लिए निकला। कई कोस दूर जाने के बाद पूरे परिवार को प्यास लगने लगी। ज्येष्ठ का महीना था आस-पास कहीं पानी नहीं दिखाई पड़ रहा था। उसके बच्चे प्यास से व्याकुल होने लगे, समझ नहीं आ रहा था कि वो क्या करे। अपने साथ लेकर चलने वाला पानी भी समाप्त हो चुका था। एक समय ऐसा आया कि उसे भगवान से प्रार्थना करनी पड़ी कि हे प्रभु, अब आप ही कुछ करो। इतने में उसे कुछ दूरी पर एक साधु तप करता हुआ नजर आया, व्यक्ति ने उस साधु से जाकर अपनी समस्या बताई। साधु बोले कि यहाँ से एक कोस दूर उत्तर की दिशा में एक छोटी दरिया बहती है, जाओ जाकर वहाँ से पानी लेकर अपने परिवार की प्यास बुझा लो। साधु की बात सुनकर उसे बड़ी प्रसन्नता हुई और उसने साधु को धन्यवाद दिया। पत्नी एवं बच्चों की स्थिति नाजुक होने के कारण वहीं रुकने के लिये बोला और खुद पानी लेने चला गया। जब वो दरिया से पानी लेकर लौट रहा था तो उसे रास्ते में पाँच व्यक्ति मिले जो अत्यंत प्यासे थे। पुण्य आत्मा को उन पाँचो व्यक्तियों की प्यास देखी नहीं गयी और अपना सारा पानी उन प्यासों को पिला दिया। जब वो दोबारा पानी लेकर आ रहा था तो पाँच अन्य व्यक्ति मिले जो उसी तरह प्यासे थे। पुण्य आत्मा ने फिर अपना सारा पानी उनको पिला दिया। यही घटना बार-बार हो रही थी, और काफी समय बीत जाने के बाद जब वो नहीं आया तो साधु उसकी तरफ चल पड़ा। बार-बार उसके इस पुण्य कार्य को देखकर साधु बोला- "हे पुण्य आत्मा, तुम बार-बार अपनी बाल्टी भरकर दरिया से लाते हो और किसी प्यासे के लिए खाली कर देते हो। इससे तुम्हें क्या लाभ मिला? पुण्य आत्मा ने बोला मुझे क्या मिला, या क्या नहीं मिला इसके बारे में मैंने कभी नहीं सोचा, पर मैंने अपना स्वार्थ छोड़कर अपना धर्म निभाया। साधु बोला- "ऐसे धर्म निभाने से क्या फायदा जब तुम्हारे अपने बच्चे और परिवार ही जीवित ना बचें? तुम अपना धर्म ऐसे भी निभा सकते थे जैसे मैंने निभाया। पुण्य आत्मा ने पूछा- "कैसे महाराज? साधु बोला- "मैंने तुम्हे दरिया से पानी लाकर देने के बजाय दरिया का रास्ता ही बता दिया। तुम्हें भी उन सभी प्यासों को दरिया का रास्ता बता देना चाहिए था। ताकि तुम्हारी भी प्यास मिट जाये और अन्य प्यासे लोगों की भी। फिर किसी को अपनी बाल्टी खाली करने की जरुरत ही नहीं"। इतना कहकर साधु अंतर्ध्यान हो गया। पुण्य आत्मा को सब कुछ समझ आ गया कि *अपना पुण्य खाली कर दूसरों को देने के बजाय, दूसरों को भी पुण्य अर्जित करने का रास्ता या विधि बतायें।* यही तत्व ज्ञान है- *[ अगर किसी के बारे में अच्छा सोचना है तो उसे उस परमात्मा से जोड़ दो ताकि उसे हमेशा के लिए लाभ मिलता रहे ]* सदैव प्रसन्न और आशावान रहिए, *जो प्राप्त है पर्याप्त है।* 🙏जय जय श्री राधे🙏
Comments (16)

Rama Devi Sahu
Nov 9, 2025
Aap ko bhi Bahut Bahut Dhanyawad Bhai 🙏 Bhagwan Aap ko Hamesha Mangal Kare 🙏 Aap ka Kalyan Ho 🙏🌹🌹

Rama Devi Sahu
Nov 9, 2025
🙏‼️ Shri Krishna Govind Hare Murari Hey Nath Narayan Vasudeva ‼️🙏

RAKESH SHARMA OM NAMH SHIVAY 🥀🚩
Nov 9, 2025
अति सुंदर अपार सराहनीय बेहद प्रशंसनीय प्रस्तुती कोटि कोटि धन्यवाद जी 🌄🙏👍🥀

RAKESH SHARMA OM NAMH SHIVAY 🥀🚩
Nov 9, 2025
है श्री कृष्ण करुणा सिंदों दिन बंधो जगत पते गोपेश गोपिका कांत राधा कांत नमोस्तुते नमो नमः जय श्री राधे कृष्णा जी 🚩🙏🌄

Rama Devi Sahu
Nov 9, 2025
Thank You Bhai 🙏🌹🌹

Rama Devi Sahu
Nov 9, 2025
Jai Shree Krishna 🙏 Radhe Radhe 🙏 Suprabhat Jii 🙏 Bhagwan ki Aasirbad Aap or Aap ke Pure Parivar ko Hamesha Sukh Shanti or Samriddhi Pradan Kare 🙏 Aap ka Har Pal Subha Mangalmay Ho 🙏🌹🌹

Rama Devi Sahu
Nov 9, 2025
Jai Shree Shyam 🙏🌹❤️🌹Aap ka Din Subha Mangalmay Ho 🙏🌹🌹

Rama Devi Sahu
Nov 9, 2025
Comment or Prashansa krne ke liye Bahut Bahut Dhanyawad Meri Choti Pyari Behen ❤️🌹❤️

प्रेम कुमार
Nov 9, 2025
🌹🌹 जय श्री कृष्णा राधे राधे 🌹🌹 शुभ प्रभात वंदन बहना 🌹 आप का दिन मंगलमय हो 🌹 आप हमेशा खुश रहे स्वस्थ रहें 🌹

