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संत हृदय नवनीत समाना। कहा कबिन्ह परि कहै न जाना॥ निज परिताप द्रवइ नवनीता। पर सुख द्रवहिं संत सुपुनीता॥

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बद्रीप्रसादअसाटी

बद्रीप्रसादअसाटी

Nov 16, 2025

जय जय श्री राम जी गाते हनुमान जी,