
Rama Devi Sahu
20 days ago
🕉️🌿 कांवड यात्रा 🌿🕉️ ~~~~~~~~~~~~~~ सावन की रिमझिम फुहारों के बीच जब 'हर_हर_महादेव' के जयकारों से पूरी दिशाएँ गूंज उठती हैं, और लाखों लोग नंगे पाँव हाथों में कांवड़ थामे निकल पड़ते हैं... तो मन में एक सवाल कौंधता है। आखिर कौन था वो पहला शिवभक्त, जिसने भक्ति के इस कठिन मार्ग की नींव रखी थी? कौन था वो पहला कांवड़िया, जिसकी श्रद्धा के आगे गंगा की धारा भी शीश झुका गई? "कांवड़ यात्रा और पहला कांवड़िया कौन था, इसे लेकर हिंदू धर्म में कई पौराणिक कथाएं और मान्यताएं प्रचलित हैं। प्रमुख पौराणिक कथाओं के अनुसार पहले कांवड़िया बनने का श्रेय इन चार कथाओं में से एक को दिया जाता है 1. भगवान_परशुराम (सर्वप्रिय पौराणिक मान्यता) सबसे प्रसिद्ध और व्यापक मान्यता के अनुसार भगवान परशुराम सबसे पहले कांवड़िया थे। भगवान परशुराम भगवान शिव के परम भक्त थे। उन्होंने उत्तर प्रदेश के बागपत के पास स्थित 'पुरा_महादेव' में शिवलिंग की स्थापना की थी। अपने आराध्य शिवजी का जलाभिषेक करने के लिए वे गढ़मुक्तेश्वर (ब्रजघाट) से गंगाजल अपने कंधे पर कांवड़ में रखकर पैदल लाए थे और शिवलिंग पर चढ़ाया था। माना जाता है कि सावन के महीने में गंगाजल लाकर शिवजी को चढ़ाने की यह प्रथा तभी से शुरू हुई। 2. श्रवण_कुमार (मातृ-पितृ भक्ति की कथा) एक अन्य लोकप्रिय कथा के अनुसार श्रवण कुमार को पहला कांवड़िया माना जाता है। त्रेतायुग में श्रवण कुमार के दृष्टिहीन माता-पिता ने तीर्थ यात्रा करने की इच्छा जताई। श्रवण कुमार ने एक बांस की बहंगी (कांवड़) बनाई और उसमें दोनों तरफ दो टोकरियां बांधकर अपने माता-पिता को बिठाया। वे उन्हें कंधे पर उठाकर हरिद्वार लाए और गंगा स्नान कराया। वापसी में वे वहां से गंगाजल भी साथ लाए थे। कांवड़ के इस रूप की शुरुआत यहीं से मानी जाती है। 3. लंकापति_रावण (समुद्र मंथन की कथा) समुद्र मंथन के प्रसंग से जुड़ी एक और प्रचलित कथा में रावण को पहला कांवड़िया बताया गया है। समुद्र मंथन के दौरान जब भयंकर विष (हलाहल) निकला, तो सृष्टि की रक्षा के लिए भगवान शिव ने उसे पी लिया। विष के प्रभाव से उनका कंठ नीला पड़ गया और शरीर में तीव्र जलन होने लगी। शिवजी के इस कष्ट को दूर करने के लिए उनके परम भक्त रावण ने कठिन तपस्या की। रावण ने कांवड़ में पवित्र_गंगाजल भरा और पैदल चलकर पुरा_महादेव' स्थित शिवलिंग पर जलाभिषेक किया, जिससे शिवजी के शरीर की जलन शांत हुई। 4. भगवान_श्री_राम (सुल्तानगंज से देवघर) एक अन्य मान्यता के अनुसार भगवान श्री राम पहले कांवड़िया थे। भगवान राम ने सुल्तानगंज (बिहार) से उत्तरवाहिनी गंगा का जल कांवड़ में भरा और नंगे पांव पैदल चलकर झारखंड स्थित देवघर (बाबा_वैद्यनाथ_धाम) में ज्योतिर्लिंग का जलाभिषेक किया था। आज भी लाखों श्रद्धालु इसी रास्ते पर कांवड़ यात्रा करते हैं। 🌿 हर हर महादेव 🌺🙏 🌿 बोल बम का नारा है बाबा एक सहारा है।🌺🙏
Comments (2)

Rama Devi Sahu
Aug 10, 2026
हर-हर महादेव जी शुभ प्रभात वंदन जी मेरे महादेव बाबा की कृपा आप पर बनी रहे ठाकुर जी आप को सदा खुश रखे आपका दिन मंगलमय हो 🌹🙏🙏🌹

Srikumar महाराज🇮🇳☸️
Aug 10, 2026
ବୋଲ୍ ବମ୍ ଏକ ଦୃଢ଼ ବନ୍ଧୁତା ପାଇଁ ପ୍ରତିଦିନ କଥାବାର୍ତ୍ତା ଆବଶ୍ୟକ ହୁଏ ନାହିଁ, ସବୁବେଳେ ଏକାଠି ରହିବା ଆବଶ୍ୟକ ହୁଏ ନାହିଁ। ଯେପର୍ଯ୍ୟନ୍ତ ସମ୍ପର୍କ ହୃଦୟରେ ରହିଥାଏ, ପ୍ରକୃତ ବନ୍ଧୁ କେବେ ଅଲଗା ହୁଅନ୍ତି ନାହିଁ। ଶୁଭ ସକାଳ
