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*जीवन दर्शन - स्वाध्याय* स्वाध्याय के कई अर्थ हैं जैसे - स्वयं अध्ययन करना, स्वयं को पढ़ना, ज्ञानवर्धन, मन व चिंतन द्वारा नियंत्रण आदि. समावर्तन अर्थात् शिक्षा या ब्रह्मचर्य की समाप्ति पर आचार्य मुख्यतः स्वाध्याय का ही उपदेश देते हैं. वेद, पुराण, उपनिषद, ब्राह्मण ग्रन्थ, स्मृति आदि में भी स्वाध्याय का अत्यधिक महत्व बताया गया है. आश्रम व्यवस्था के अंतर्गत वानप्रस्थ आश्रम का प्रधान कर्तव्य स्वाध्याय में ही निहित है. *मेरी संस्कृति…मेरा देश…मेरा अभिमान 🚩*

Comments (4)

Srikumar  महाराज🇮🇳☸️

Srikumar महाराज🇮🇳☸️

Feb 17, 2026

🙏जय श्री राम बालक 🙏आपके विचारों को साझा करने के लिए समय निकालने के लिए मैं वास्तव में आपका आभारी हूं!

Srikumar  महाराज🇮🇳☸️

Srikumar महाराज🇮🇳☸️

Feb 17, 2026

राम राम बच्चा सौम्य शर्मा धन्यवाद भगवान सदा आपके परिवार का कल्याण करें मेरी शुभकामना है कि आप हमेशा खुश और स्वस्थ रहें। 🙏

Saumya Sharma

Saumya Sharma

Feb 17, 2026

आपकी सभी पोस्ट बहुत ही सुंदर और ज्ञानवर्धक होती हैं 👌👌👌 धन्यवाद 🙏 ठाकुर जी की कृपा आप सपरिवार पर सदैव ही बनी रहे 🙏 यही शुभकामना है और आप ऐसे ही ज्ञान की बातों से हमारा मार्गदर्शन करते रहें यही प्रार्थना है बड़े भाई 🙏🌹☺️

Saumya Sharma

Saumya Sharma

Feb 17, 2026

जय श्री राम 🙏 जय बजरंगबली 🙏 आपको फाल्गुनी अमावस्या की हार्दिक शुभकामनाएं 🙏🌹☺️ राम जी की कृपा और बजरंगबली का साथ आपको सदैव मिलता रहे 🙏 आप सदैव स्वस्थ रहें, सुरक्षित रहें और अपनों के साथ हँसते मुस्कुराते रहें ☺️ इसी शुभकामना के साथ सुप्रभात वंदन भाई जी 🙏🌹☺️