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Rama Devi Sahu

304 days ago

*देवउठनी एकादशी की तिथि सहित अन्य जानकारी* कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को देवउठनी एकादशी कहा जाता है। यह तिथि हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र और शुभ मानी गई है। इसी दिन भगवान विष्णु चार महीनों की योग निद्रा से जागते हैं। भगवान विष्णु के जागने के साथ ही चातुर्मास का समापन होता है और सभी मांगलिक कार्य जैसे विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन आदि पुनः प्रारंभ हो जाते हैं। देवउठनी एकादशी को देव प्रबोधिनी एकादशी, देवोत्थान एकादशी या प्रबोधिनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन साधक भगवान विष्णु की विशेष पूजा-अर्चना करते हैं और व्रत का पालन करते हैं। इसके साथ ही इस दिन मां लक्ष्मी की पूजा करने का विधान है। इस साल एकादशी तिथि दो दिन होने के कारण असमंजस की स्थिति बनी हुई है कि किस दिन देवउठनी एकादशी का व्रत रखना लाभकारी हो सकता है। आइए जानते हैं देवउठनी एकादशी की सही तिथि, शुभ मुहूर्त, पारण का समय और मंत्र के बारे में… कब है देवउठनी एकादशी? वैदिक पंचांग के अनुसार, कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 1 नवंबर को सुबह में 9 बजकर 12 मिनट पर आरंभ हो रही है, जो 2 नवंबर को शाम 7 बजकर 32 मिनट पर समाप्त होगी। ऐसे में देवउठनी एकादशी का व्रत स्मार्त लोग 1 नवंबर को और वैष्णव संप्रदाय के लोग 2 नवंबर को रखेंगे। दरअसल, वैष्णव परंपरा में व्रत का पारण हरियासर करते हैं यानी श्री हरि विष्णु के जागने का सटीक मुहूर्त होता है। वहीं स्मार्त लोग पंचांग के अनुसार रखते हैं। स्मार्त हिन्दू धर्म में गृहस्थों का एक समुदाय है जो पंचदेवों (विष्णु, शिव, शक्ति, गणेश और सूर्य) की पूजा करता है। देवउठनी एकादशी व्रत पारण का समय 2 नवंबर को पारण का समय – दोपहर 01 बजकर 11 मिनट से 03 बजकर 23 मिनट हरि वासर समाप्त होने का समय – 12:55 पीएम 3 नवंबर को गौण एकादशी के लिए पारण का समय – सुबह 06 बजकर 34 मिनट से से 08 बजकर 46 मिनट तक देवउठनी एकादशी पूजा विधि देवउठनी एकादशी के दिन प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में उठकर सभी दैनिक कार्यों से निवृत्त होकर स्नान करें। इसके बाद स्वच्छ और preferably पीले रंग के वस्त्र पहनें, क्योंकि यह रंग भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है। फिर भगवान विष्णु का स्मरण करते हुए व्रत का संकल्प लें और पूजा आरंभ करें। पूजा से पहले जल से आचमन करें, तत्पश्चात भगवान विष्णु को पीले रंग के फूल, माला अर्पित करें और पीला चंदन लगाएं। पूजा के दौरान पीले रंग की मिठाई, गन्ना, सिंघाड़ा, मौसमी फल आदि का भोग लगाएं और जल अर्पित करें। इसके बाद घी का दीपक और धूप जलाकर भगवान विष्णु की आराधना करें। पूजा के समय विष्णु चालीसा, एकादशी व्रत कथा, श्री विष्णु स्तोत्र और विष्णु मंत्रों का पाठ करना शुभ माना जाता है। अंत में आरती करें और किसी भी भूल-चूक के लिए क्षमा याचना करें। दिनभर व्रत का पालन करें और संध्या के समय पुनः विधिवत पूजा कर घर के प्रवेश द्वार पर घी का दीपक जलाएं। अगले दिन द्वादशी तिथि के शुभ मुहूर्त में व्रत का पारण करें और भगवान विष्णु का धन्यवाद करें। आप सभी का दिन शुभ हो 🙏🏻😊 *---‐----------------------------

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Comments (6)

Rama Devi Sahu

Rama Devi Sahu

Oct 31, 2025

Dhanyawad 🙏 Subha Dopahar Jii 🙏 Radhey Radhey ❤️ Jai Shree Krishna 🙏🌹🌹

shraddhansri s s.

shraddhansri s s.

Oct 31, 2025

very nice thank you 🙏

Rama Devi Sahu

Rama Devi Sahu

Oct 31, 2025

🌹🌹 Good Noon Jii 🌹🌹

Rama Devi Sahu

Rama Devi Sahu

Oct 31, 2025

Jai Ho Mere Prabhu Shri Hari Vishnu ebm Mata Lakshmi Ji ki 🙏🥀🥀

Rakesh Kumar

Rakesh Kumar

Oct 31, 2025

🌹🌹🌹🌹🌹

Rakesh Kumar

Rakesh Kumar

Oct 31, 2025

jai shree shyam 🙏