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_खोल श्वास परिपूर्ण औषध-_ श्वास जीवन का आधार है, मन और जीवन के बीच रहस्यमयी रोर है जिसके सहारे कोई भी प्राणी जीवन में कदम रखता है। इसलिए शारीरिक संरचना में श्वास की गति का स्थान महत्वपूर्ण है, क्योंकि श्वास की गति बढ़ने से शरीर का तापमान बढ़ता है जिसे कम आयु का संकेतक भी कह सकते हैं। धापा टाकणारे जनावर इसका प्रमाण हैं, _"धापा टाकण्याची गती जितनी तीव्र होगी, मृत्यु की निश्चितता उतनी ही बढ़ेगी"_ यह एक शास्त्रीय तथ्य है। जैसे _कबूतर_ एक मिनट में _37 बार श्वास लेता है और केवल 9 वर्ष जीवित_ रहता है। _ससा_ भी _प्रति मिनट 39 बार श्वास लेता है और उसकी आयु लगभग 9 वर्ष_ मानी गई है। _कुत्ता_ 1 मिनट में 29 श्वास लेता है और _13 वर्ष जीवित_ रहता है। _बकरी_ 24 बार, तो _हाथी_ 1 मिनट में 11 बार श्वास लेकर _100 वर्ष_ जीवित रहता है। _कासव_ 1 मिनट में केवल 4 श्वास लेकर _150 वर्ष_ की दीर्घायु जगता है। मनुष्य के लिए सामान्यतः _"जीवेत् शरद शतम्"_ की कहावत प्रचलित है। इसका अर्थ है कि कभी उसकी श्वासों की गति निश्चित रूप से औसत रही होगी कि वह कम से कम 100 वर्ष जी सके, अर्थात _11 से 12 श्वास प्रति मिनट।_ आज मनुष्य का _श्वास दर बढ़ने से_ उसके आयु में भी _कमी_ आई है। औसत _आयु 60 से 65 वर्ष_ रह गई है। कई आधुनिक वैज्ञानिकों का मानना है कि यदि मनुष्य के शरीर के तापमान को आधा किया जा सके, तो वह आसानी से 1000 वर्ष तक जी सकता है, इसके लिए उसे अपनी श्वास की गति को नियंत्रित करना होगा। इसका अर्थ है _"मनुष्य की श्वास गति को प्रति मिनट 2 से 3 तक नियंत्रित करना।"_ यह बहुत चुनौतीपूर्ण है लेकिन असंभव नहीं। प्राचीन काल में ऋषियों के हजारों वर्ष तक जीवित रहने के तथ्यों से सिद्ध होता है कि _दीर्घायु का रहस्य मनुष्य की श्वास गति में छिपा है।_ इसलिए हमें अपनी श्वास गति को नियंत्रित करने के लिए _प्रथम श्वास-उच्छवास की पद्धति को समझना होगा।_ दूसरा, अपने प्राण को साधने का एक निश्चित, दुष्परिणामरहित मार्ग _"प्राणायाम"_ है। श्वास की रोर पर मानव जीवन और उसका स्वास्थ्य टिका हुआ है। _श्वास जितना स्थिर, मजबूत होगा, जीवन उतना ही स्वस्थ और निरोगी होगा।_ श्वास में _जितनी अधिक गतिशीलता, तीव्रता आएगी, स्वास्थ्य की संभावना उतनी ही कम होती जाएगी।_ यह शास्त्रीय तथ्य है। क्योंकि श्वास का सीधा संबंध शरीर के तापमान से है। जिस तीव्रता से श्वास गतिशील होगा, उसी अनुपात में शरीर के तापमान में वृद्धि होगी। _क्रोध, आवेश, उत्तेजना की स्थिति में श्वास दर में ऐसी वृद्धि होती है।_ _खोल श्वास परिपूर्ण औषध_ खोल श्वास लेने का अर्थ स्पष्ट करते हुए _प्राण विज्ञान विशेषज्ञ डॉक्टर मेकडॉवल_ कहते हैं कि 'प्राणायाम से _फुफ्फुसों को ही नहीं, पाचन संस्थान को भी परिपूर्ण पोषण मिलता है। खोल श्वास रक्तशुद्धि के लिए अमूल्य औषध लेने जैसा है।_ मनुष्य की कार्यक्षमता बढ़ाने, उसमें स्फूर्ति और उल्लास जगाने में खोल श्वास लेने का अभ्यास महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। _इसलिए दीर्घायु के लिए रोजाना सातत्य से प्राणायाम करें_

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