
Rama Devi Sahu
296 days ago
समय ही मित्र और परीक्षक जीवन का सबसे बड़ा सत्य यही है कि समय कभी एक-सा नहीं रहता। कभी यह पुष्प की तरह सुगंधित होकर हमारे चारों ओर सुख और समृद्धि बिखेर देता है, तो कभी यह शूल बनकर हमारी सहनशक्ति की परीक्षा लेता है। जब समय अनुकूल होता है, तब चारों दिशाओं से लोग हमारे समीप आते हैं, हमारे गुणों की प्रशंसा करते हैं, और हमारे चारों ओर संबंधों का जाल बुनते हैं। परंतु यही लोग, वही चेहरे, वही शब्द तब मौन हो जाते हैं जब समय प्रतिकूल दिशा में बहने लगता है। मनुष्य की वास्तविक पहचान तभी होती है जब परिस्थितियाँ प्रतिकूल होती हैं। जो व्यक्ति आपके साथ उस समय खड़ा रहता है जब आप टूट रहे हों, वही वास्तव में आपका अपना होता है। सुख के समय की भीड़ मित्रता का प्रमाण नहीं देती, बल्कि दुख के समय की निष्ठा ही सच्चे संबंधों की पहचान होती है। संसार स्वभाव से ही अवसरवादी है — यहाँ संबंध अक्सर स्वार्थ और सुविधा के धागों से बुने जाते हैं। अतः जब भाग्य चमकता है, तो लोग उस उजाले की ओर आकर्षित होते हैं; पर जब वही दीपक मंद पड़ता है, तो अंधकार में सब दिशाएँ खाली दिखने लगती हैं। इसलिए मनुष्य को चाहिए कि वह अपने सुख के क्षणों में विनम्र रहे और दुःख के समय धैर्यवान। समय की गति निरंतर है, वह किसी के लिए रुकती नहीं। आज जो बुरा है, वह कल अच्छा भी हो सकता है। अतः हमें न तो सुख में अहंकार करना चाहिए, न दुःख में निराशा। हर परिस्थिति एक शिक्षक है—सुख सिखाता है कृतज्ञता, और दुःख सिखाता है विवेक। जब बुरा समय आता है, तो वह हमें लोगों का नहीं, स्वयं का भी परिचय कराता है। वह दिखाता है कि भीतर कितना साहस, कितनी सहनशक्ति और कितनी श्रद्धा है। जो व्यक्ति कठिन समय में अपनी स्थिरता बनाए रखता है, वही भविष्य का निर्माण करता है। इसलिए समय से भयभीत होने की आवश्यकता नहीं है; बल्कि उसे गुरु के रूप में स्वीकार कर लेना ही जीवन की बुद्धिमत्ता है। अंततः यही सत्य है—अच्छे समय में मित्र मिलते हैं, पर बुरे समय में “स्वयं” से भेंट होती है। जो इस भेंट को पहचान लेता है, वही जीवन का सार समझ लेता है। जय श्री सीताराम!🙏

Comments (2)

Rama Devi Sahu
Nov 7, 2025
Dhanyawad Jii 🥀🥀

Rakesh Kumar
Nov 7, 2025
very nice ji
