
shree Rana
137 days ago
*माँ शक्ति अंतर्ध्यान दिवस – धामा, झालावाड़, दसाड़ा की पवित्र कथा* चैत्र वद तेरस का दिन था। झालावाड़ के दसाड़ा तालुका स्थित धामा नगरी में आज भी इस दिन को ‘माँ शक्ति अंतर्ध्यान दिवस’ के रूप में याद किया जाता है। बहुत समय पहले पाटडी पर पराक्रमी राजा हरपालदेव का शासन था। उनकी धर्मपत्नी थीं माँ शक्ति – साक्षात जगदंबा का अवतार। राजा हरपालदेव जानते थे कि उनकी रानी कोई साधारण स्त्री नहीं, बल्कि स्वयं आदिशक्ति हैं। विवाह के समय माँ शक्ति ने राजा से एक वचन लिया था – “जिस दिन मैं लोगों के सामने अपने देवी स्वरूप में प्रकट हो जाऊँगी, उसी दिन मैं इस लोक से विदा ले लूँगी और अपने स्वधाम लौट जाऊँगी।” राजा ने वचन दे दिया। समय बीतता गया। माँ शक्ति रानी के रूप में प्रजा का पालन करती रहीं। उनके तीन राजकुमार थे और एक पुत्री उमादे। फिर एक दिन वह घड़ी आ गई। माँ शक्ति महल के झरोखे में बैठी थीं। नीचे आंगन में उनके तीनों राजकुमार और एक चारण का पुत्र खेल रहे थे। तभी एक मदमस्त हाथी बेकाबू होकर चिंघाड़ता हुआ राजमहल में घुस आया। वह सीधा बच्चों की ओर दौड़ा। झरोखे से यह दृश्य देखते ही माँ शक्ति ने पल भर भी नहीं गंवाया। उन्होंने झरोखे से अपना हाथ बढ़ाया। एक ही क्षण में उन्होंने चारण के पुत्र को ताली मारकर दूर हटा दिया, और अपने तीनों पुत्रों को हथेली पर उठाकर झरोखे में खींच लिया। यह चमत्कार वहाँ खड़े सैकड़ों लोगों ने अपनी आँखों से देखा। किसी मनुष्य के लिए इतनी दूरी से, इतनी तेजी से, तीन बच्चों को एक साथ बचाना असंभव था। भीड़ स्तब्ध रह गई। फिर चारों ओर “माँ की जय” “जगदंबा की जय” के नारे गूंजने लगे। सब समझ गए कि रानी माँ साक्षात देवी हैं। माँ शक्ति ने मुस्कुराकर राजा हरपालदेव की ओर देखा। वचन का समय आ गया था। वे महल की सीढ़ियाँ उतरीं और चुपचाप गढ़ के परकोटे की ओर चल पड़ीं। राजा, पुत्र, प्रजा – सब रोते-बिलखते पीछे दौड़े, पर माँ रुकी नहीं। धामा की पवित्र भूमि पर पहुँचकर माँ शक्ति पालथी मारकर बैठ गईं। तभी उनकी पुत्री उमादे दौड़ती हुई आई और माँ के चरणों में लिपट गई – “माँ, मैं भी आपके बिना नहीं रह सकती। मुझे भी साथ ले चलो।” माँ ने करुणामयी दृष्टि से देखा और उमादे को अपनी गोद में बैठा लिया। देखते-ही-देखते धरती धीरे-धीरे खुली और माँ शक्ति अपनी पुत्री सहित उसी में समा गईं। अंतर्ध्यान हो गईं। राजा हरपालदेव और समस्त प्रजा स्तब्ध खड़े रहे। जहाँ माँ समाईं थी, वह स्थान आज भी पूजनीय है। तभी से चैत्र वद तेरस को धामा में माँ शक्ति अंतर्ध्यान दिवस मनाया जाता है। यह दिन याद दिलाता है कि जब-जब धर्म पर संकट आता है, शक्ति स्वयं किसी-न-किसी रूप में प्रकट होकर रक्षा करती है, और अपना कार्य पूर्ण कर फिर अपने धाम लौट जाती है। *जय माँ शक्ति। जय धामा धरनी।*

Comments (2)

Rama Devi Sahu
May 14, 2026
Very Nice Story 👌👌 Maa ki Aasirbad Aap pr Sadeib Bani Rahe 🙏🌺 Jai Mata Di 🌺🙏

Rama Devi Sahu
May 14, 2026
🙏🌺 Jai Maa Ambey Jagadambey 🌺🙏
