
Rama Devi Sahu
257 days ago
लंका पर चढ़ाई के लिए जब श्रीराम और वानर-सेना समुद्र पर सेतु बना रहे थे, तब लाखों वानर बड़े-बड़े पर्वत और चट्टानें उठाकर समुद्र में डाल रहे थे। सेना का शोर, चट्टानों की गड़गड़ाहट और काम की व्यस्तता सब तरफ छाई थी। इन्हीं के बीच एक छोटी-सी गिलहरी भी वहाँ आई। उसने देखा कि प्रभु का कार्य हो रहा है। वह सोचने लगी— “मैं छोटी हूँ, न पर्वत उठा सकती हूँ, न बड़े काम कर सकती हूँ। पर मैं राम के काम में हाथ तो बँटा सकती हूँ।” वह दौड़कर रेत में जाती, अपने शरीर पर रेत लुढ़काती और फिर समुद्र में जाकर झाड़ देती। इस तरह बार-बार आकर वह अपने नन्हें योगदान से सेतु निर्माण में लग गई। वानर यह देखकर हँसने लगे— “अरे छोटी-सी गिलहरी! तेरे इन रेत के कणों से क्या होगा? हम यहाँ पर्वत गिरा रहे हैं और तू यह खेल कर रही है।” एक वानर ने तो उसे झिड़क भी दिया। गिलहरी उदास होकर दूर बैठ गई। श्रीराम ने यह दृश्य देखा और तुरंत गिलहरी को अपने हाथों में उठा लिया। उसके छोटे-से सिर पर हाथ फेरते हुए बोले— “तुम्हारा योगदान बड़ा नहीं है, लेकिन इसमें प्रेम और निष्ठा है। तुम्हारा हर एक कण इस सेतु की नींव को मजबूत करेगा। भक्ति में बड़ा या छोटा कुछ नहीं होता— जो भाव से किया जाए वही महान है श्रीराम ने प्रेमपूर्वक गिलहरी की पीठ पर हाथ फेरा। कहा जाता है कि उसी क्षण उनकी उँगलियों के निशान गिलहरी के शरीर पर पड़ गए। तभी से आज तक गिलहरी की पीठ पर तीन-तीन धारियाँ दिखाई देती हैं।

Comments (2)

Rama Devi Sahu
Dec 16, 2025
🙏🌺 Shubha Mangalvar ki Subha Kamanayen ke Sath Ram Ram Jii 🙏 Aap ka Aashirvad se Sab kuch Mangal Ho Rahi hai... Aap ka Aabhari hu.. Ji Shukriya 🙏 Bhagwan Aap ko Hamesha Mangal Rakhe or Swastha Surakshit Rakhe 🙏 Aap ka Kalyan Ho 🙏🌹🌹

H.S.CHAHAR
Dec 16, 2025
🙏🌹जय श्री राम 🚩बहुत सुंदर कथा भगवान ऐसे ही आपको ज्ञान प्रदान करें आप ऐसे ही नई-नई कथा पोस्ट करते रहे आपका दिन मंगलमय हो 🌹🙏सुबह की राम राम जी 🙏🚩
