
Rama Devi Sahu
36 days ago
🙏ॐ नमो भगवते वासुदेवाय।🙏 ये नींद नहीं, सृष्टि के विश्राम का महापर्व है! 🕉️ देवशयनी एकादशी - चातुर्मास प्रारंभ 🕉️ आषाढ़ शुक्ल एकादशी को भगवान श्रीहरि विष्णु क्षीरसागर में शेषशैय्या पर 4 मास के लिए योगनिद्रा में लीन होते हैं। इसी दिन से चातुर्मास का आरंभ होता है। शास्त्र क्या कहता है? पद्म पुराण और भविष्य पुराण में इसे हरिशयनी कहा गया है - सुप्ते त्वयि जगन्नाथ जगत् सुप्तं भवेदिदम्। विबुद्धे त्वयि बुद्धं च जगत् सर्वं चराचरम्॥ अर्थात हे जगन्नाथ! आपके सो जाने पर सम्पूर्ण जगत सो जाता है और आपके जागने पर सम्पूर्ण चराचर जगत जाग उठता है। यह निद्रा आलस्य नहीं, योगनिद्रा है। सृष्टि के पालन का भार इस काल में देवाधिदेव महादेव संभालते हैं। इसीलिए चातुर्मास में शिव आराधना, भजन, व्रत का अनंत फल मिलता है। 2026 में देवशयनी - 25 जुलाई, शनिवार तिथि प्रारंभ: 24 जुलाई सुबह 09:12 से पारण: 26 जुलाई प्रातः 05:39 से 08:22 तक चातुर्मास में क्या करें, क्या न छोड़ें? चातुर्मास श्रावण, भाद्रपद, आश्विन और कार्तिक - ये 4 मास साधना के हैं। 1. विवाह, गृहप्रवेश जैसे मांगलिक कार्य बंद होते हैं, क्योंकि इस काल में सृष्टि की सकारात्मक ऊर्जा अंतर्मुखी हो जाती है। 2. आयुर्वेद कहता है - वर्षा में जठराग्नि मंद होती है, इसलिए शास्त्रों ने पत्तेदार साग, दही, बैंगन, मूली का त्याग बताया है। 3. इस काल में किया एक जप, एक दान, सौ गुना होकर लौटता है। तो आज से बाहरी शोर बंद, भीतरी यात्रा प्रारंभ! आप चातुर्मास में कौन सा एक नियम लेने वाले हैं? 🙏 देवशयनी एकादशी की हार्दिक शुभकामनाएँ। श्री हरि विष्णु की कृपा आप और आपके परिवार पर सदैव बनी रहे। ॐ नमो भगवते वासुदेवाय 🙏

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