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Rama Devi Sahu

2 hours ago

क्या आप जानते हैं एक भक्त का नाम कैसे जुड़ा " गणपति बप्पा मोरया " जयकारे में ? 🟨🟨🟨🟨🟨🟨🟨🟨🟨🟨🟨🟨🟨 'गणपति बप्पा मोरया' केवल एक जयकारा नहीं, इन तीन शब्दों में एक भक्त का नाम भी जुड़ा हुआ है, जिसकी भक्ति की अपनी एक दिलचस्प कहानी है गणपति बप्पा' का अर्थगणपति बप्पा में गणपति का अर्थ है - सभी गणों के स्वामी यानि भगवान गणेश और बप्पा का अर्थ मराठी में 'पिता' या 'संरक्षक' होता है। यह शब्द दर्शाता है कि सभी भक्त गणेश जी को परिवार के सदस्य या मार्गदर्शक के रूप में मानते हैं। गणपति बप्पा' का नारा लगाना केवल श्रद्धा से नहीं जुड़ा है, बल्कि यह अपनेपन और स्नेह से भी जुड़ा है। लोग परिवार के मुखिया के रूप में गणेश जी का स्वागत करते हैं और उन्हें अपने घर में 10 दिन अपने परिवार के सदस्य की तरह रखते हैं। 'मोरया' शब्द का रहस्य'मोरया' शब्द जुड़ा है मोरया गोसावी नामक महान संत से, जो 14वीं शताब्दी में महाराष्ट्र के चिंचवाड़ गाँव में जन्मे थे। वे भगवान गणेश के परम भक्त थे और जीवनभर गणेश भक्ति में लीन रहे। वे हर वर्ष 95 किलोमीटर की पैदल यात्रा करके मयूरेश्वर मंदिर जाते थे। ऐसा उन्होंने 117 साल तक किया। जब वृद्धावस्था में वे यात्रा नहीं कर पाए, तो भगवान गणेश ने स्वयं उनके पास आकर दर्शन दिए। इसके बाद मोरया गोसावी ने गणेश जी की मूर्ति को अपने गाँव में स्थापित किया और वहाँ से उनका नाम 'मोरया' गणेश भक्ति का प्रतीक बन गया। कहते हैं कि जो लोग मयूरेश्वर मंदिर नहीं जा पाते थे, वे मोरया गोसावी के इस मंदिर में आकर गणेश जी के दर्शन कर लेते थे। लोगों को मोरया गोसावी की भक्ति पर असीम श्रद्धा थी। महाराष्ट्र में पहले छत्रपति शिवाजी महाराज ने गणेश चतुर्थी बड़े स्तर पर शुरू की थी लेकिन बाद में यह महोत्सव कहीं खो सा गया था। बाद में लोकमान्य तिलक द्वारा गणेशोत्सव को पुनर्जीवित किया गया और फिर से यह नारा और भी प्रसिद्ध हो गया। इसलिए जब भक्त 'गणपति बप्पा मोरया' कहते हैं, तो वे सिर्फ अपने मार्गदर्शक और संरक्षक गणेशजी का जयकारा नहीं लगाते, बल्कि मोरया गोसावी की भक्ति को सम्मान भी देते हैं। यह नारा सिर्फ जयकारा नहीं, बल्कि भक्ति, विश्वास और परंपरा का प्रतीक भी है। विसर्जन के समय भी भक्त एक अलग जयकारा लगाते हैं। वे कहते हैं - “गणपति बप्पा मोरया, पुडचा वर्षी लवकर या”। इसका अर्थ है कि 'गणेश जी, अगले वर्ष जल्दी आइए'। 🌹🙏🏻🌹 विघ्नेश्वराय वरदाय सुरप्रियाय। लम्बोदराय सकलाय जगद्धितायं।। नागाननाय श्रुतियज्ञविभूषिताय। गौरीसुताय गणनाथ नमो नमस्ते॥ भावार्थ :👉 विघ्नेश्वर, वर देनेवाले, देवताओं को प्रिय, लम्बोदर, कलाओंसे परिपूर्ण, जगत् का हित करनेवाले, गजके समान मुखवाले और वेद तथा यज्ञ से विभूषित पार्वतीपुत्र को नमस्कार है ; हे गणनाथ ! आपको नमस्कार है । 🙏भगवान श्री गणेश जी महाराज की जय 🙏🏻 🟨🟨🟨🟨🟨🟨🟨🟨🟨🟨🟨🟨🟨 Ganpati Bappa Moriya..🙏🌺

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