
Rama Devi Sahu
71 days ago
📖मोहमूल बहु सूल प्रद ,त्यागहु तम अभिमान।📖 📖भजहु राम रघुनायक , कृपा सिंधु भगवान॥📖 🌹👉संसार में सभी बुराइयों, पापों और दुखों की जड़ 'मोह' (अज्ञान और आसक्ति) है। जब व्यक्ति किसी नश्वर चीज या शरीर से अंधा प्रेम करने लगता है, तो वह सही-गलत का भेद भूल जाता है। यह मोह बहुत सारे 'सूल' यानी कांटे और गहरे दर्द देता है। रावण का अपनी शक्ति और लंका के प्रति मोह ही उसके विनाश का कारण बन रहा था। 🌹👉यहाँ 'तुम' शब्द का वास्तविक पाठ 'तम' (तमोगुण/अंधकार) है। अहंकार एक ऐसा अंधकार है जो मनुष्य की बुद्धि को पूरी तरह नष्ट कर देता है। हनुमान जी कहते हैं कि इस अज्ञान रूपी अंधेरे को तुरंत छोड़ दो। 🌹👉अहंकार को छोड़ने के बाद मन खाली नहीं रहता। इसलिए हनुमान जी रावण को परामर्श देते हैं कि अपने मन को रघुकुल के स्वामी प्रभु श्रीराम के चरणों में लगाओ। 🌹👉भगवान राम कोई साधारण राजा नहीं, बल्कि स्वयं 'कृपा के समुद्र' हैं। समुद्र की विशेषता है कि उसमें कितनी भी नदियां (गलतियां) समा जाएं, वह अपनी मर्यादा नहीं छोड़ता। राम जी इतने दयालु हैं कि यदि रावण आज भी अपनी भूल मान ले, तो वे उसे क्षमा कर देंगे। 🌹👉हनुमान जी रावण को एक शत्रु की तरह नहीं, बल्कि एक शुभचिंतक की तरह समझा रहे हैं, जब तक भीतर अहंकार रहेगा, तब तक भगवान की कृपा का अनुभव नहीं हो सकता। प्रभु श्रीराम शरणागत वत्सल हैं। 🙏जो कोई भी अपना अभिमान छोड़कर उनकी शरण में आता है, राम जी उसके सारे दुखों (सूल) को हर लेते हैं।🙏 📖🌸श्रीरामचरितमानस —" सुंदरकांड"🌸📖 श्री सुन्दरकाण्ड पाठ मंच 🔱हनुमान बगिया🔱

Comments (2)

Rama Devi Sahu
Jun 25, 2026
🙏‼️ Om Namo Bhagavate Vasudevaya Namah ‼️🙏 Suprabhat Ji 🌹 Nirjala Ekadashi ki Hardik Shubhkamnaye 🌹🌹

RAKESH SHARMA OM NAMH SHIVAY 🥀🚩
Jun 20, 2026
जय श्री राम जय हनुमान,, मंगल भवन है मंगल हारी द्रव्य उस दशरथ अजर बिहारी 🚩 दीनदयाल वीरे दु संभारी हरेयू नाथ संकट भारी 🙏🙏🙏🚩🚩🚩
