
Srikumar महाराज🇮🇳☸️
65 days ago
बेसन की सौंधी रोटी पर खट्टी चटनी जैसी माँ,याद आती है चौका-बासन, चिमटा, फुकनी जैसी माँ।हाथों में खुरदरे छाले हैं, फिर भी कितनी ममता है,सूखे होंठों पर मेरे बचपन की मीठी बातें हैं।रात-रात भर जागकर जिसने लोरी मुझे सुनाई है,उस ममता की मूरत को दुनिया कहती परछाई है।सुख-दुःख में आँचल की छाया, मीठी डांट-प्यार जैसी माँ।जब भी कोई विपदा आई, माँ ने सीने से लगाया है,आँखों के हर आँसू को अपने आँचल में छुपाया है।उसके चरणों में झुककर ही सारा जग मैंने पाया है,पंखुरी सी कोमल है फिर भी चट्टान सी वो साया है।पूजा की थाली सी पावन, जीवन का आधार जैसी माँ।
Comments (0)
No comments yet. Be the first to comment!
