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Rama Devi Sahu

142 days ago

🌺 जब त्रिदेव बन गए शिशु: सती अनुसूया की अद्भत🙏 कथा 🌺 भक्तों का मान बढ़ाने और अहंकार का मर्दन करने के लिए प्रभु समय-समय पर अद्भुत लीलाएँ रचते हैं। ऐसी ही एक दिव्य कथा है परम पतिव्रता सती अनुसूया की, जिनकी महिमा तीनों लोकों में गूँजती है। एक समय माता लक्ष्मी, माता पार्वती और माता सरस्वती को अपने पातिव्रत्य पर गर्व हो गया। तब भगवान की प्रेरणा से देवर्षि नारद ने उनकी परीक्षा लेने का उपाय रचा। नारद जी ने तीनों देवियों के सामने अनुसूया जी की महिमा का वर्णन किया और कहा कि उनके समान पतिव्रता तीनों लोकों में कोई नहीं। यह सुनकर देवियों के मन में ईर्ष्या उत्पन्न हुई और उन्होंने अपने पतियों—ब्रह्मा, विष्णु और महेश (शिव)—को सती अनुसूया की परीक्षा लेने भेज दिया। तीनों देव साधु का रूप धारण कर चित्रकूट स्थित महर्षि अत्रि के आश्रम पहुँचे। उस समय महर्षि अत्रि वहाँ नहीं थे। अनुसूया जी ने अतिथियों का आदर किया, परंतु उन साधुओं ने एक विचित्र शर्त रखी— "देवी! हम भिक्षा तभी स्वीकार करेंगे जब आप निर्वस्त्र होकर हमें भोजन परोसेंगी।" क्षणभर के लिए अनुसूया जी ठिठकीं, परंतु अपने तपोबल से उन्होंने पहचान लिया कि ये कोई साधारण साधु नहीं, बल्कि स्वयं त्रिदेव हैं। तब उन्होंने संकल्प लिया— "यदि मेरा पतिव्रत्य सत्य है, तो ये तीनों देव अबोध शिशु बन जाएँ!" उनकी वाणी सिद्ध हुई और देखते ही देखते त्रिदेव शिशु बन गए। माता अनुसूया ने मातृत्व भाव से उनका पालन किया, उन्हें दुग्धपान कराया और प्रेमपूर्वक पालने में सुला दिया। उधर जब लक्ष्मी, पार्वती और सरस्वती को अपने पतियों का कोई समाचार नहीं मिला, तो वे चिंतित होकर चित्रकूट पहुँचीं। वहाँ नारद जी ने बताया कि उनके पति तो अनुसूया जी के आश्रम में बाल रूप में हैं। यह सुनकर तीनों देवियाँ लज्जित हो गईं। उन्होंने अनुसूया जी के चरणों में गिरकर कहा— "माता! हमसे भूल हो गई, कृपया हमारे पतियों को उनके वास्तविक रूप में लौटा दें।" अनुसूया जी का हृदय दया से भर गया। उन्होंने मंत्र जल छिड़का और त्रिदेव पुनः अपने दिव्य स्वरूप में प्रकट हो गए। त्रिदेव उनकी भक्ति और पतिव्रत धर्म से अत्यंत प्रसन्न हुए और वरदान दिया कि वे अपने अंश से उनके पुत्र रूप में जन्म लेंगे। इसी वरदान के फलस्वरूप जन्म हुआ भगवान दत्तात्रेय का—जो ब्रह्मा, विष्णु और महेश के संयुक्त अवतार माने जाते हैं।🙏 🙏🏻 जय माँ 🌺 ✨ यह कथा हमें सिखाती है कि सच्ची भक्ति, निष्ठा और 🙏विनम्रता के आगे स्वयं देवता भी नतमस्तक हो जाते हैं।

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