MyMandirInstall

आयुर्वेद के अनुसार त्रिदोष (वात, पित्त, कफ) को संतुलित करने का सबसे प्रभावी तरीका कोई एक उपाय नहीं, बल्कि दिनचर्या + आहार + योग + मन की शुद्धि का संयुक्त अभ्यास है। 1. सबसे पहला नियम: अग्नि (पाचन शक्ति) को ठीक रखना 🔥 शास्त्रों में कहा गया है कि अधिकांश रोगों की जड़ मंद अग्नि है। भूख लगने पर ही भोजन करें अधिक भोजन न करें बासी, अत्यधिक तला-भुना और पैकेट फूड कम करें भोजन के बाद 100 कदम चलें रात का भोजन हल्का रखें 2. दिनचर्या (Dinacharya) ब्रह्ममुहूर्त में उठना जीभ साफ करना गुनगुना पानी पीना नियमित व्यायाम या योग समय पर सोना (10 बजे के आसपास) 3. त्रिदोष संतुलित करने वाला योग सूर्य नमस्कार नाड़ी शोधन प्राणायाम भ्रामरी प्राणायाम शशांकासन वज्रासन इनमें नाड़ी शोधन को त्रिदोष संतुलन के लिए विशेष माना गया है। 4. मन का संतुलन आयुर्वेद कहता है कि रजस और तमस बढ़ने पर दोष भी बिगड़ते हैं। प्रतिदिन 10-20 मिनट ध्यान साक्षी भाव का अभ्यास क्रोध, भय और चिंता का निरीक्षण 5. त्रिदोष संतुलित आहार मूंग दाल घी (उचित मात्रा में) ताजा फल मौसमी सब्जियां सादा और सात्त्विक भोजन 6. शास्त्रों में अत्यंत प्रशंसित उपाय अभ्यंग (तेल मालिश) चरक संहिता में अभ्यंग को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया गया है। सप्ताह में 2-3 बार तिल तेल से शरीर की मालिश विशेषकर सिर, कान और पैरों पर 7. आध्यात्मिक दृष्टि से यदि एक ही उपाय चुनना हो तो: नियमित नाड़ी शोधन प्राणायाम + सात्त्विक भोजन + समय पर नींद यह त्रिदोष संतुलन के लिए सबसे व्यापक और सुरक्षित संयोजन माना जाता है।

Post media

Comments (4)

Srikumar  महाराज🇮🇳☸️

Srikumar महाराज🇮🇳☸️

Jun 4, 2026

इसका लाभ उठाएं और जीवन भर स्वस्थ और समृद्ध रहें। मेरी पोस्ट पर आपकी सभी प्रतिक्रियाओं के लिए धन्यवाद। अपना ख्याल रखना 🙏

Srikumar  महाराज🇮🇳☸️

Srikumar महाराज🇮🇳☸️

Jun 4, 2026

राधे-राधे प्यारी चोटी का धन्यवाद दोपहर इसका आनंद लें 🙏

Saumya Sharma

Saumya Sharma

Jun 4, 2026

बहुत ही सुंदर ज्ञानवर्धक पोस्ट के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद भाई जी 🙏🌹☺️

Saumya Sharma

Saumya Sharma

Jun 4, 2026

जय श्री राधे कृष्ण भैया जी 🙏 शुभ मंगलकामनाओं के साथ शुभ दोपहर वंदन 🙏🌹☺️