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*🌞~ वैदिक हिन्दू पंचांग ~🌞* *⛅दिनांक - 24 जनवरी 2026* *⛅दिन - शनिवार* *⛅विक्रम संवत् - 2082* *⛅अयन - उत्तरायण* *⛅ऋतु - शिशिर* *⛅मास - माघ* *⛅पक्ष - शुक्ल* *⛅तिथि - षष्ठी रात्रि 12:39 जनवरी 25 तक तत्पश्चात् सप्तमी* *⛅नक्षत्र - उत्तर भाद्रपद दोपहर 02:16 तक तत्पश्चात् रेवती* *⛅योग - शिव दोपहर 02:02 तक तत्पश्चात् सिद्ध* *⛅राहुकाल - सुबह 09:54 से सुबह 11:17 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅सूर्योदय - 07:09* *⛅सूर्यास्त - 06:09 (सूर्योदय एवं सूर्यास्त उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅दिशा शूल - पूर्व दिशा में* *⛅ब्रह्ममुहूर्त - प्रातः 05:25 से प्रातः 06:17 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅अभिजीत मुहूर्त - दोपहर 12:17 से दोपहर 01:01 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅निशिता मुहूर्त - रात्रि 12:13 जनवरी 25 से रात्रि 01:05 जनवरी 25 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *🌥️व्रत पर्व विवरण - स्कंद षष्ठी* *🌥️विशेष - षष्ठी को नीम की पत्ती, फल या दातुन मुंह में डालने से नीच योनियों की प्राप्ति होती है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)* *🔹 सर्दियों में गोमूत्र-सेवन 🔹* *🔸 शरीर की पुष्टि के साथ शुद्धि भी आवश्यक है । गोमूत्र शरीर के सूक्ष्म-अतिसूक्ष्म स्रोतों में स्थित विकृत दोष व मल को मल-मूत्रादि के द्वारा बाहर निकाल देता है । इसमें स्थित कार्बोलिक एसिड कीटाणुओं व हानिकारक जीवाणुओं को नष्ट करता है । इससे रोगों का समूल उच्चाटन करने में सहायता मिलती है । गोमूत्र में निहित स्वर्णक्षार रसायन का कार्य करते हैं । अतः गोमूत्र के द्वारा शरीर की शुद्धि व पुष्टि दोनों कार्य पूर्ण होते हैं ।* *🔸 कफ के रोग (जैसे सर्दी खांसी आदि)वायु के रोग, पेट के रोग, गैस, अग्निमान्ध, गठिया, घुटने का दर्द, पीलिया लीवर के रोग, प्लीहा के रोग, बहुमूत्रता, शोथ, जोड़ों का दर्द, बच्चों के रोग, कान के रोग, सर में रुसी, सिरदर्द आदि में उपयोगी ।* *🔹सेवन विधिः🔹* *🔸 प्रातः 25 से 40 मि.ली. (बच्चों को 10-15 मि.ली.) गोमूत्र कपड़े से सात बार छानकर पियें । इसके बाद 2-3 घंटे तक कुछ न लें । ताम्रवर्णी गाय अथवा बछड़ी के मूत्र सर्वोत्तम माना गया है ।* *🔹विशेष : सुबह गोमूत्र में 10-15 मि.ली. गिलोय का रस (अथवा 2-3 ग्राम चूर्ण) मिलाकर पीना उत्कृष्ट रसायन है ।* *🔸ताजा गोमूत्र न मिलने पर गोझरण अर्क का प्रयोग करें । 10-20 मि.ली. (बच्चों को 5-10 मि.ली.) गोझरण अर्क पानी में मिलाकर लें ।* *(गोझरण अर्क सभी संत श्री आशारामजी बापू आश्रमों व समितियों के सेवाकेन्द्रों पर उपलब्ध है ।) - 📖 ऋषि प्रसाद दिसम्बर 2012*

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