
Rama Devi Sahu
207 days ago
लोगों के बीच रहकर लोगों से कट कर रहना मुश्किल है, पर असंभव नहीं। ~ हरिॐ जी ~ || जय श्री राधा माधव || मनुष्य समाज में रहते हुए पूरी तरह लोगों से अलग नहीं हो सकता, क्योंकि व्यवहार, जिम्मेदारियाँ और संबंध उसे बांधे रखते हैं। फिर भी, भीतर से आसक्त न होकर, अपेक्षाओं और मोह से दूरी बनाए रखना संभव है। यह कठिन अवश्य है, पर असंभव नहीं। लोगों के बीच रहकर उनसे “कटे” रहने का अर्थ शारीरिक दूरी नहीं, बल्कि मानसिक वैराग्य है। • बिना अपेक्षा के व्यवहार करना। • बिना आसक्ति के संबंध निभाना। • बिना प्रतिक्रिया के परिस्थितियों को स्वीकार करना। यही वह स्थिति है जहाँ मन शांत रहता है और व्यक्ति संसार में रहते हुए भी संसार से बंधता नहीं। यह मार्ग साधना का है—अभ्यास से आता है, समझ से गहराता है और विवेक से टिकता है। || श्री गुरु चरणं | श्री कृष्ण शरणम् ||

Comments (2)

Rama Devi Sahu
Feb 5, 2026
*🚩#ॐ नमो भगवते वासुदेवायनमः.श्रीहरि विष्णु जी महाराज सभी को सुख शांति समृद्धि अन्न धन प्रदान करो प्रभु* *श्रीकृष्ण गोविन्द हरे मुरारी, *हे नाथ नारायण वासुदेवाय!* ●▬ஜ۩۞۩ஜ▬● *जय जय श्री राधे राधे जी* * * 🙏🌹🙏🌹🙏

Srikumar महाराज🇮🇳☸️
Feb 4, 2026
आपको शुभ रात्रि, शांतिपूर्वक आराम करें। राम राम 🙏
