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Rama Devi Sahu

78 days ago

आमतौर पर जब कोई व्यक्ति हमारे विचारों, मान्यताओं या सिद्धांतों के विपरीत बात करता है, तो हमारा अहंकार तुरंत सक्रिय हो जाता है। हम उस भिन्न राय को बिल्कुल नहीं सहन नहीं पाते। हम उसे अपने अस्तित्व या ज्ञान पर एक हमले की तरह देखने लगते हैं, जिससे हम सामने वाले पर क्रोधित हो जाते हैं या उससे मन ही मन द्वेष पाल लेते हैं हमारे मन में अपमान का बोध, छटपटाहट और सामने वाले को 'गलत' साबित करके उसे बदलने की एक अजीब सी बौखलाहट पैदा हो जाती है। यह प्रतिक्रिया इस बात का संकेत है कि हमारा रिमोट कंट्रोल दूसरों के हाथों में है और हमारी आंतरिक स्थिरता अभी विकसित नहीं हुई है। लेकिन जब आप सामने वाले की अलग राय को बिना किसी शिकायत, बिना किसी गुस्से और बिना उसे सुधारे जैसी है वैसी ही स्वीकार कर लेते हैं, तो यह आपकी कमजोरी नहीं, बल्कि आपकी सर्वोच्च परिपक्वता को दर्शाता है। यहाँ से आपके जीवन का एक नया अध्याय इसलिए शुरू होता है क्योंकि अब आप प्रतिक्रियावादी (reactive) नहीं रह जाते, बल्कि आत्म-नियंत्रित और शांत हो जाते हैं। इस अवस्था में पहुँचकर आप अपने सबसे शक्तिशाली स्वरूप में होते हैं, क्योंकि आपकी आंतरिक शांति अब किसी बाहरी परिस्थिति या किसी दूसरे व्यक्ति के शब्दों की मोहताज नहीं रह जाती। जब आपको खुद को सही साबित करने की कोई बेताबी नहीं होती, तब आप ऊर्जा के उस स्तर पर होते हैं जहाँ कोई आपको मानसिक रूप से हिला नहीं सकता। यही वह वास्तविक शक्ति है जहाँ आप दूसरों को बदलने की व्यर्थ कोशिश छोड़ कर, स्वयं के भीतर स्थिर होना सीख जाते हैं। ओम शांति। आपका दिन मंगलमय हो।

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Comments (1)

Srikumar  महाराज🇮🇳☸️

Srikumar महाराज🇮🇳☸️

Jun 13, 2026

स्वयं को आत्मा समझें और शांत रहें। आपके विचार जितने शुद्ध होंगे, जीवन में उतनी ही शांति आएगी। ॐ शांति।🙏