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🌹यह चित्र माता तुलसी (देवी वृंदा) का है। पौराणिक हिंदू ग्रंथों (जैसे पद्म पुराण और शिव पुराण) के अनुसार, तुलसी जी के पौधे के रूप में प्रकट होने की कहानी उनके वृंदा अवतार और दानव राज जलंधर से जुड़ी है।🌹 🌹इसकी मुख्य कथा इस प्रकार है :🌹 🌹1.🌹 वृंदा का पातिव्रत धर्म और जलंधर की शक्तिपौराणिक कथा के अनुसार, पूर्वजन्म में तुलसी जी का नाम वृंदा था और उनका जन्म एक राक्षस कुल में हुआ था। वह बचपन से ही भगवान विष्णु की परम भक्त थीं। युवा होने पर उनका विवाह समुद्र मंथन से उत्पन्न हुए पराक्रमी राक्षस जलंधर से हुआ। वृंदा एक अत्यंत सती और पतिव्रता स्त्री थीं। उनके इसी सतीत्व (पातिव्रत धर्म) की शक्ति के कारण जलंधर अमर और अजेय हो गया था, जिसे देवता भी युद्ध में नहीं हरा पा रहे थे।🌹 🌹2.🌹 देवताओं का संकट और भगवान विष्णु की मायाजलंधर ने अपनी अजेय शक्ति के घमंड में स्वर्ग पर आक्रमण कर दिया और देवताओं को पराजित कर भगा दिया। घबराए हुए सभी देवता भगवान शिव और भगवान विष्णु के पास सहायता के लिए पहुंचे। जब तक वृंदा का सतीत्व भंग नहीं होता, तब तक जलंधर को मारना असंभव था। इसलिए, ब्रह्मांड की रक्षा के लिए भगवान विष्णु ने जलंधर का रूप धारण किया और वृंदा के महल में पहुंच गए। अपने पति के रूप में समझकर वृंदा ने उनका स्वागत किया, जिससे उनका पातिव्रत नियम टूट गया।🌹 🌹3.🌹 जलंधर का वध और वृंदा का श्रापवृंदा का सतीत्व भंग होते ही युद्ध भूमि में भगवान शिव ने जलंधर का आसानी से वध कर दिया। जब वृंदा को भगवान विष्णु के इस छल का पता चला, तो वे अत्यंत क्रोधित हो गईं। उन्होंने भगवान विष्णु को श्राप दिया, "आपने एक पत्थर की भांति हृदयहीन व्यवहार किया है, इसलिए आप अभी पत्थर के बन जाएं।🌹" 🌹अपने भक्त के श्राप को स्वीकार करते हुए भगवान विष्णु तुरंत शालिग्राम पत्थर बन गए।🌹

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Comments (1)

rajni

rajni

Aug 14, 2026

jai Tulsi maiya