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प्रनवउँ पवनकुमार खल बन पावक ग्यान घन। जासु हृदय आगार बसहिं राम सर चाप धर॥ मैं पवनकुमार श्री हनुमानजी को प्रणाम करता हूँ, जो दुष्ट रूपी वन को भस्म करने के लिए अग्निरूप हैं, जो ज्ञान की घनमूर्ति हैं और जिनके हृदय रूपी भवन में धनुष बाण धारण किए श्री रामजी निवास करते हैं.. ✍️🌷🙏 🙏🪔जय श्री राम🪔 🙏 🙏🪔 जय बजरंगबली 🪔🙏 प्रभु श्री राम जी एवं हनुमान जी का आशीर्वाद सदैव आप और आपके परिवार पर बनी रहें, राम राम जी 🚩🙏 🙏🌃 शुभ रात्रि वंदना ✨🙏

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Comments (1)

Bajra Singh Chouhan

Bajra Singh Chouhan

Nov 9, 2025

🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻