
Haresh Chanchlani Chanchlani
316 days ago
प्रनवउँ पवनकुमार खल बन पावक ग्यान घन। जासु हृदय आगार बसहिं राम सर चाप धर॥ मैं पवनकुमार श्री हनुमानजी को प्रणाम करता हूँ, जो दुष्ट रूपी वन को भस्म करने के लिए अग्निरूप हैं, जो ज्ञान की घनमूर्ति हैं और जिनके हृदय रूपी भवन में धनुष बाण धारण किए श्री रामजी निवास करते हैं.. ✍️🌷🙏 🙏🪔जय श्री राम🪔 🙏 🙏🪔 जय बजरंगबली 🪔🙏 प्रभु श्री राम जी एवं हनुमान जी का आशीर्वाद सदैव आप और आपके परिवार पर बनी रहें, राम राम जी 🚩🙏 🙏🌃 शुभ रात्रि वंदना ✨🙏


