
Suman ✨
3 hours ago
🌺Hanuman chalisa ka paath🙏🌹🌺 🌺श्री हनुमान चालीसा हिन्दू धर्म के महान संत गोस्वामी तुलसीदास द्वारा 16वीं शताब्दी में अवधी भाषा में रचित चालीस चौपाइयों और दोहों का एक पवित्र काव्य है।🙏🌹🌺🌺 🌺प्रारंभिक दोहे 🌺श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि। बरनऊं रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि॥ बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार। बल बुद्धि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार॥🌺 🌺हनुमान चालीसा पाठ (आरंभिक चौपाइयाँ) 🌺जय हनुमान ज्ञान गुन सागर। जय कपीस तिहुं लोक उजागर॥ रामदूत अतुलित बल धामा। अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा॥ महाबीर बिक्रम बजरंगी। कुमति निवार सुमति के संगी॥ कंचन बरन बिराज सुबेसा। कानन कुंडल कुंचित केसा॥ हाथ बज्र औ ध्वजा विराजै। काँधे मूँज जनेऊ साजै॥ शंकर सुवन केसरीनंदन। तेज प्रताप महा जग बंदन॥ विद्यावान गुनी अति चातुर। राम काज करिबे को आतुर॥ प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया। राम लखन सीता मन बसिया॥ सूक्ष्म रूप धरि सियहि दिखावा। बिकट रूप धरि लंक जरावा॥ भीम रूप धरि असुर संहारे। रामचन्द्र के काज संवारे॥ लाय सजीवन लखन जियाये। श्रीरंगि हरषि उर लाए॥ घृप कीन्हि राम बहुत बड़ाई। तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई॥ सहस बदन तुम्हरो जस गावैं। अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं॥ सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा। नारद सारद सहित अहीसा॥ जम कुबेर दिक्पाल जहाँ ते। कवि कोविद् कहि सके कहाँ ते। तुम उपकार सुग्रीवहि कीन्हा। राम मिलाय राज पद दीन्हा॥ तुम्रो मन्त्र बिभीषण माना। लंकेश्वर भए सब जग जाना॥ युग सहस्र योजन पर भानू। लील तही मधुर फल जानू॥ प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं। जलधि लांघि गये अचरज नाहीं॥ दुर्गम काज जगत के जेते। सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते॥ राम दुआरे तुम रखवारे। होत न आज्ञा बिनु पैसारे॥ सब सुख लहै तुम्हारी सरना। तुम रक्षक काहू को डरना॥ आपन तेज संहारो आपै। तीनों लोक हाँक तें काँपै॥ भूत पिशाच निकट नहीं आवै। महाबीर जब नाम सुनावै॥ नासै रोग हरे सब पीरा। जपत निरंतर हनुमत बीरा॥ संकट से हनुमान छुड़ावै। मन क्रम वचन ध्यान जो लावै॥ सब पर राम तपस्वी राजा। तिनके काज सकल तुम साजा॥ और मनोरथ जो कोई लावे। सोई अमित जीवन फल पावे॥ चारों जुग परताप तुम्हारा। है परसिद्ध जगत उजियारा॥ साधु संत के तुम रखवारे। असुर निकंदन राम दुलारे॥ अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता। अस बर दीन जानकी माता॥ राम रसायन तुम्रे पासा। सदा रहो रघुपति के दासा॥ तुम्रे भजन राम को पावै। जन्म जन्म के दुख बिरावै॥ अंतकाल रघुवर पुर जाई। जहाँ जन्म हरि-भक्त कहाई॥ और देवता चित्त न धरई। हनुमत से सर्व सुख करई॥ संकट कटै मिटे सब पीरा। जो सुमिरे हनुमत बलबीरा॥ जय जय जय हनुमान गोसाईं। कृपा करहु गुरुदेव की नाईं॥ जो सत बार पाठ कर कोई। छूटहि बंदी महा सुख होई॥ जो यह पढ़े हनुमान चालीसा। होय सिद्धि साखी गौरीसा॥ तुलसीदास सदा हरि चेरा। कीजै नाथ हृदय महा डेरा॥🌺 🌺समापन दोहा पवनतनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप। राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप॥ 🙏🌹🌺🌺 Jai Shree Ram 🙏 🚩Jai Shree Hanuman 🙏 🌺

Comments (11)

Selvaraj T
Oct 27, 2026
🛕🛕Veera Anumar 🛕🛕

LALAN KUMAR
Oct 27, 2026
संकट मोचन हनुमान की जय जी।शुभ रात्रि विश्राम जी।प्रभु आपको सदैव स्वस्थ खुश और सुरक्षित रखें जी

Suman ✨
Oct 27, 2026
Jai Shree Ram ji ki 🙏🌹🌺

Savita om namah shivay 🙏🌹
Oct 27, 2026
jai shree ram ji ki 🙏🌹

Suman ✨
Oct 27, 2026
copy paste hai ji 🙏bcoz ye shudh hindi me kabhi type nahi kiya ji ...ek do bar likhne ki koshish kari but sirdard hai type Krna ...notebook me likha jata h but phone me thoda mushkil hai mere liye to ji 🙏 😀😊Jai bajrangbali 🙏🌹🌺

Shah 🩷
Oct 27, 2026
आज आपने बहुत बड़ा कैप्शन लिखा है पूरी चौपाई लिख दी 🪷जय बजरंगबली🌹

Suman ✨
Oct 27, 2026
Jai Shree Ram 🙏🚩Jai bajrangbali 🙏🌹🌺

Shah 🩷
Oct 27, 2026
जय बजरंग बली 🌹

Suman ✨
Oct 27, 2026
shubh sandhya ji 🙏 🌹

Suman ✨
Oct 27, 2026
Jai Veer Hanuman 🙏🌺
