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Rama Devi Sahu

167 days ago

पूरी पोस्ट एक बार जरूर पढ़ें। भगवान शिव की पत्नी माता सती थी। एक बार माता सती के पिता दक्ष प्रजापति ने,भगवान शिव का अपमान किया। तब माता सती से,अपने पति शिवजी का ये अपमान सहन ना हुआ और उन्होंने अपना शरीर अग्नि में त्याग कर दिया। जब भगवान शिव को ये खबर मिली तो वो बहुत क्रोधित हुए और माता सती के मृत शरीर को लिए धरती व आकाश में तांडव करने लगे। इसके कई वर्षों बाद माता सती का जन्म हिमालय पर्वत पर पार्वती जी के रूप में हुआ। बचपन से ही पार्वती जी 24 घंटे भगवान शिव के ध्यान में मग्न रहती और भगवान शिव को पाने के लिए कठोर तप करने लगी। इस तप से पार्वती जी का शरीर सूखने लगा। भगवान शिव को अपने ध्यान में महसूस हुआ कि,सती का जन्म पार्वती जी के रूप में हो चुका है और वो मेरे लिए कठीन तपस्या कर रही है। भगवान शिव ने सप्त ऋषियों को बुलाया और कहा-जाओ पार्वती के प्रेम की परीक्षा लो,यदि वो परीक्षा में पास हो जाए तो उनसे कह देना कि,अब तपस्या छोड़ दो, शिवजी प्राप्त हो जाएंगे। सप्त ऋषि जाकर पार्वती जी से बोले-इतनी कठोर तपस्या क्यों कर रही हो? पार्वती जी बोली-मेरे गुरु नारद जी ने बचपन में मुझसे कहा था की तुम्हारे पति शिवजी होंगे। तब से मैं भगवान शिव को पाने की तपस्या कर रही हूँ। सप्त ऋषि हँसकर बोले-नारद की बात मानने वाले तो बर्बाद हो जाते है,तुम नारद की बात मत मानो। शिवजी तो कभी कभी बिना वस्त्रों के घूमते है,उनमें कोई लज़्ज़ा नहीं है। चिता की राख लगाते है, मरे हुए लोगों के सरो की माला पहनते है। ना ही उनके कुल का कोई पता है। बडे बडे ज़हरीले साँप गले में डाले रहते है। ऐसे दूल्हे के लिए इतना तप कर रही हो? इससे सुंदर दूल्हा हम आपको बताते हैं-विष्णुजी का नाम सुना है? वो वैकुंठ में रहते है,वो बहुत सुंदर है। आपको उनसे विवाह करना चाहिए। पार्वती जी बोली-मेरा मन शिव जी से रम गया है,अब तो केवल शिवजी ही मेरे पति होंगे। अगर इस जन्म में शिव जी नहीं मिले तो करोड़ जन्म लूँगी और हर जन्म में तप करूँगी लेकीन मेरे पति शिवजी ही होंगे। अगर शिवजी भी आकर मना करेंगे तो मैं, उनकी भी नहीं सुनूँगी। ये सुनकर सप्त ऋषियों ने पार्वती जी को प्रणाम किया और बोले भगवान शिव ने ही आपकी परीक्षा के लिए हमें यहाँ भेजा था। भगवान शिव को पता है कि आप तप कर रहीं है। विवाह पक्का हुआ अब आपको और तपस्या करने की जरुरत नहीं। इस प्रकार भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ। भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह इस पृथ्वी का प्रथम प्रेम विवाह माना जाता है। माँ पार्वती ने भगवान को पाने के लिए अपना सब कुछ दाव पर लगा दिया ❤️

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Comments (5)

Saumya Sharma

Saumya Sharma

Mar 16, 2026

बहुत ही सुन्दर अति मनभावन पोस्ट के साथ बेहतरीन कथा प्रसंग 👌👌👌 के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद दी 🙏 महादेव और मां आदिशक्ति भवानी जी की कृपा आप सपरिवार पर सदैव ही बनी रहे 🙏 यही शुभकामना है 🙏🌹☺️

Saumya Sharma

Saumya Sharma

Mar 16, 2026

शिव शंभू को जिसने पूजा,उसका ही उद्धार हुआ 🙏, जो भी शरण में आया इनके, उसका बेड़ा पार हुआ 🙏, हर हर महादेव 🙏 जय शिव शक्ति 🙏 बाबा भोलेनाथ और मां आदिशक्ति भवानी जी की कृपा आप पर सदैव ही बनी रहे 🙏 आप सदैव स्वस्थ रहें, सुरक्षित रहें और अपनों के साथ हँसते मुस्कुराते रहें ☺️ इसी शुभकामना के साथ शुभ संध्या वंदन मेरी प्यारी दीदी 🙏🌹☺️

Saumya Sharma

Saumya Sharma

Mar 16, 2026

हर हर महादेव 🙏 जय श्री राधे कृष्ण बहना जी 🙏🌹☺️

Rama Devi Sahu

Rama Devi Sahu

Mar 16, 2026

Shubha Somavar 🌹 Shubha Dopahar Jii 🌹 Bhagwan Bhole Nath ki Aasirbad se Aap ka Din Subha Mangalmay Ho 🌹 Hari Om Namah Shivay 🙏🔱🌿🌺🕉️🕉️🕉️

Srikumar  महाराज🇮🇳☸️

Srikumar महाराज🇮🇳☸️

Mar 16, 2026

ଶୁଭ ସୋମବାର! ଶୁଭ ସକାଳ! ହର ହର ମହାଦେବ! ଭଗବାନ ଭୋଲେନାଥଙ୍କ କୃପାରୁ ଆପଣଙ୍କ ଦିନ ଶୁଭ ହେଉ। ଆଜି ସୋମବାର ସକାଳେ ଆପଣଙ୍କୁ ହାର୍ଦ୍ଦିକ ଏବଂ ପ୍ରେମପୂର୍ଣ୍ଣ ଶୁଭେଚ୍ଛା ଜଣାଉଛି।🙏