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*🌹जगन्नाथ रथ यात्रा 2026: क्यों खास है मौसी 'गुंडिचा का मंदिर', जहां दर्शन मात्र से मिलता है मोक्ष?🌹* 💐💐💐💐💐💐💐💐💐 *⭕ओडिशा के पुरी में भगवान जगन्नाथ का धाम जहां दर्शन मात्र से ही उनकी कृपा प्राप्त हो जाती है। पुरी में आकर्षण का केंद्र केवल जगन्नाथ मंदिर ही नहीं, बल्कि गुंडिचा मंदिर भी है, जिसे भगवान जगन्नाथ की 'मौसी का घर' भी कहा जाता है।* *यह मंदिर जगन्नाथ धाम से करीब 3 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है और हर साल विशाल और भव्य रथ यात्रा के दौरान गुंडिचा मंदिर सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव माना जाता है। इस साल जगन्नाथ रथ यात्रा की शुरुआत 16 जुलाई 2026 , गुरुवार के दिन शुरू होगी।* *धार्मिक मान्यता है कि, रथ यात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और बहन सुभद्रा के दर्शन करने से व्यक्ति को जन्म-मरण के चक्र से छुटकारा मिल जाता है।* *🪔पुरी का गुंडिचा मंदिर क्यों है खास?* 🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩 हिंदू परंपराओं के मुताबिक, रथ यात्रा के समय भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा भव्य रथों पर सवार होकर अपनी मौसी यानी गुंडिचा के घर पहुंचते हैं और यहां पर 7 दिनों तक विश्राम करते हैं। इसी वजह से गुंडिचा मंदिर पुरी के सबसे खास मंदिरों में शामिल है, जहां हर श्रद्धालु भगवान जगन्नाथ के दर्शन के बाद जरूर आता है। *🪔गुंडिचा मंदिर में दर्शन का आध्यात्मिक महत्व* 🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩 गुंडिचा मंदिर को लेकर धार्मिक आस्था यह भी कहती है कि, भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा के दौरान गुंडिचा मंदिर में दर्शन करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। कई पौराणिक और स्थानीय मान्यताओं के मुताबिक, जो भी भक्त श्रद्धा से भगवान के रथ के दर्शन करता है या रस्सी खींचता है, वह पुनर्जन्म के बंधन से मुक्त हो जाता है। *🪔रथ यात्रा का महत्व* 🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩 पुरी में जगन्नाथ रथ यात्रा भारत के सबसे विशाल और धार्मिक आयोजनों में से एक मानी जाती है। जहां दुनियाभर से लाखों की संख्या में श्रद्धालु भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा में शामिल होते हैं। इस दौरान भगवान जगन्नाथ का नंदीघोष रथ, भाई बलभद्र का तालध्वज और सुभद्रा का दर्पदलन रथ आकर्षण का केंद्र बनता है। यह रथ यात्रा इस बात का संदेश देती है कि, भगवान सिर्फ मंदिरों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे खुद अपने भक्तों के बीच में आकर उन्हें दर्शन देते हैं। यही वजह है कि, गुंडिचा मंदिर और रथ यात्रा दोनों को आध्यात्मिक और भक्ति का प्रतीक माना जाता है*🚩#हरिऊँ🚩 🙏🏻🙏🏻🙏🏻

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