
Rama Devi Sahu
22 days ago
🟢 एकादशी व्रत का रहस्य: भगवान विष्णु को क्यों प्रिय है यह तिथि? 📅 कामिका एकादशी व्रत — 9 अगस्त 2026, रविवार हिंदू धर्म में एकादशी व्रत को भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करने के लिए सर्वोपरि माना गया है। यह तिथि स्वयं जगत के पालनहार भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है। इसके पीछे का मूल कारण देवी एकादशी की उत्पत्ति और उनकी महिमा से जुड़ा हुआ है। पद्म पुराण के अनुसार, सतयुग में 'मुर' नाम का एक अत्यंत शक्तिशाली और भयानक दानव था। उसने अपने बल के अहंकार में स्वर्ग पर आक्रमण कर सभी देवताओं को पराजित कर दिया और स्वयं स्वर्ग का अधिपति बन बैठा। भयभीत और असहाय देवता अपनी रक्षा की गुहार लेकर देवों के देव महादेव के पास पहुँचे। भगवान शिव ने उन्हें श्री हरि विष्णु की शरण में जाने का परामर्श दिया। इसके पश्चात, सभी देवता क्षीरसागर गए और भगवान विष्णु से मुर राक्षस के अत्याचारों से मुक्ति दिलाने की प्रार्थना की। देवताओं की करुण पुकार सुनकर भगवान विष्णु मुर राक्षस से युद्ध करने के लिए रणभूमि में उतरे। देवताओं और असुरों के बीच कई वर्षों तक अत्यंत भीषण युद्ध चला। निरंतर युद्ध करते-करते श्री हरि अत्यधिक क्लान्त (थक) हो गए। तब वे इस युद्ध के बीच से बद्रिकाश्रम गए और वहाँ 'सिंहवती' नामक एक कंदरा (गुफा) में विश्राम करने चले गए और योगनिद्रा में लीन हो गए। दुष्ट मुर राक्षस भगवान विष्णु का पीछा करते हुए उस गुफा तक पहुँच गया और सोते हुए प्रभु पर प्राणघातक प्रहार करने के लिए आगे बढ़ा। जैसे ही मुर राक्षस ने वार करना चाहा, वैसे ही भगवान विष्णु के शरीर (उनकी ग्यारह इंद्रियों) से एक अत्यंत तेजस्वी, दिव्य और अस्त्र-शस्त्र से सुसज्जित सुंदर कन्या प्रकट हुई। उस दिव्य देवी ने मुर राक्षस को युद्ध के लिए ललकारा। दोनों के बीच घोर युद्ध हुआ और अंत में देवी ने एक तीव्र हुंकार भरकर उस पापी राक्षस का वध कर दिया। जब भगवान विष्णु की योगनिद्रा भंग हुई, तो उन्होंने सम्मुख मुर राक्षस का क्षत-विक्षत शरीर और उस दिव्य कन्या को देखा। विस्मित होकर प्रभु ने पूछा, "हे देवी! आप कौन हैं और इस असुर का वध किसने किया? तब उस कन्या ने हाथ जोड़कर अत्यंत विनम्रता से कहा, "हे प्रभु! मैं आपकी ही शक्ति और एकादश (ग्यारह) इंद्रियों से उत्पन्न हुई हूँ। यह राक्षस आपकी निद्रावस्था में आप पर वार करना चाहता था, इसलिए आपकी रक्षा हेतु मैंने इसका वध कर दिया। यह सुनकर भगवान विष्णु अत्यंत प्रसन्न हुए। उन्होंने उस कन्या का नाम 'एकादशी' रखा और उन्हें वरदान देते हुए कहा— "हे देवी! आज के दिन तुम्हारा प्राकट्य हुआ है, इसलिए जो भी मनुष्य प्रत्येक मास की एकादशी तिथि को पूर्ण निष्ठा से व्रत रखेगा, तुम्हारी और मेरी पूजा करेगा, उसके समस्त पाप नष्ट हो जाएंगे। वह जीवन के सभी सुखों को भोगकर अंत में मेरे परम धाम (वैकुंठ) को प्राप्त करेगा। मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को देवी एकादशी का प्राकट्य हुआ था। इसी कारण यह तिथि 'उत्पन्ना एकादशी' कहलाती है तथा एकादशी व्रत की महिमा और परंपरा का प्रारंभ इसी प्रसंग से माना जाता है। 🙏 एकादशी व्रत रखें, श्रीहरि का स्मरण करें और जीवन को पुण्य व भक्ति से प्रकाशित करें। जय श्री हरि! 🚩

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