
Rama Devi Sahu
20 days ago
बहुत सुंदर प्रसंग है जय सियाराम 🙏🏻 उस समय का प्रसंग है ... जब केवट भगवान् के चरण धो रहे है। बड़ा प्यारा दृश्य है, भगवान् का एक पैर धोकर उसे निकलकर कठौती से बाहर रख देते है और जब दूसरा धोने लगते है, तो पहला वाला पैर गीला होने से जमीन पर रखने से धूल भरा हो जाता है, केवट दूसरा पैर बाहर रखते है, फिर पहले वाले को धोते है, एक-एक पैर को सात-सात बार धोते है। फिर ये सब देखकर कहते है, प्रभु एक पैर कठौती मे रखिये दूसरा मेरे हाथ पर रखिये, ताकि मैला ना हो । जब भगवान् ऐसा ही करते है। तो जरा सोचिये ... क्या स्थिति होगी , यदि एक पैर कठौती में है दूसरा केवट के हाथो में... भगवान् दोनों पैरों से खड़े नहीं हो पाते बोले - केवट मै गिर जाऊँगा ? केवट बोला - चिंता क्यों करते हो भगवन् ! दोनों हाथो को मेरे सिर पर रख कर खड़े हो जाईये, फिर नहीं गिरेगे!! जैसे कोई छोटा बच्चा है जब उसकी माँ उसे स्नान कराती है तो बच्चा माँ के सिर पर हाथ रखकर खड़ा हो जाता है, भगवान् भी आज वैसे ही खड़े है। भगवान् केवट से बोले - भईया केवट ! मेरे अंदर का अभिमान आज टूट गया। केवट बोला - प्रभु ! क्या कह रहे है ? भगवान् बोले - सच कह रहा हूँ केवट, अभी तक मेरे अंदर अभिमान था, कि .... मै भक्तो को गिरने से बचाता हूँ पर.. आज पता चला कि, भक्त भी भगवान् को गिरने से बचाता।
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