
Rama Devi Sahu
154 days ago
ॐ नमो भगवते रूद्राय 🙏 प्रदोष व्रत, भगवान शिव को समर्पित एक पवित्र व्रत है, जो हर महीने दो बार आता है। मार्च में ये व्रत तीन बार है, और अगला प्रदोष व्रत 30 मार्च को है। इस दिन त्रयोदशी तिथि सुबह 7:09 बजे से शुरू होकर अगले दिन सुबह 6:55 बजे समाप्त होगी। इस व्रत की पूजा सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में करना शुभ माना जाता है। पूजा विधि: - सुबह स्नान कर व्रत का संकल्प लें। - शिवलिंग का पंचामृत से अभिषेक करें। - शाम 6:38 से 8:57 तक पूजा का समय है। - बेलपत्र, धतूरा और अक्षत अर्पित करें। - शिव चालीसा और प्रदोष व्रत कथा का पाठ करें। - आरती के बाद प्रसाद वितरित करें। इस व्रत के दौरान जलाभिषेक करते समय सावधान रहें कि शिवलिंग पर सिंदूर, केतकी का फूल या तुलसी का पत्ता न चढ़ाएं। इस व्रत से मानसिक शांति, उत्तम स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। शिव जी की कृपा पाने के लिए चंदन, बेलपत्र और शहद अर्पित करना विशेष फलदायी होता है। चैत्र माह की त्रयोदशी तिथि 30 मार्च को सुबह 7 बजकर 9 मिनट पर शुरू होगी और 31 मार्च को सुबह 6 बजकर 55 मिनट पर समाप्त होगी। सोम प्रदोष व्रत का पारण 31 मार्च को सुबह 6 बजकर 55 मिनट के बाद होगा।

Comments (2)

Rama Devi Sahu
Mar 30, 2026
Same to You Jii 🙏 Mahadev Har 🙏🌿🔱

Rohit Patel
Mar 30, 2026
wish you too जी 🔱🌹🌸🪷🌿📿🙏💞💕💞💕💞
