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Rama Devi Sahu

67 days ago

मनुष्य अपने जीवन में किसी न किसी को आदर्श मानकर आगे बढ़ता है। आदर्श व्यक्ति के विचार, व्यवहार और चरित्र समाज पर गहरा प्रभाव डालते हैं। यदि आदर्श सत्य, धर्म, ईमानदारी और सदाचार का पालन करता है, तो उसके अनुयायी भी उन्हीं गुणों को अपनाते हैं और समाज में सुख, शांति तथा समृद्धि का वातावरण बनता है। किन्तु जब आदर्श ही भ्रष्ट हो जाए, झूठ, लालच, छल और स्वार्थ को अपनाए, तब समाज में भी वही प्रवृत्तियाँ फैलने लगती हैं। परिणामस्वरूप अविश्वास, कलह, अन्याय और मानसिक अशांति बढ़ती है। ऐसे वातावरण में व्यक्ति का जीवन कष्टों से घिर जाता है। इसलिए भगवान श्रीकृष्ण का संदेश भी यही है कि हमें सदैव श्रेष्ठ चरित्र, सत्य और धर्म का अनुसरण करना चाहिए तथा अपने जीवन में ऐसे आदर्श चुनने चाहिए जो हमें नैतिकता और ईश्वर के मार्ग पर आगे बढ़ाएँ। संदेश : "श्रेष्ठ आदर्श जीवन को ऊँचा उठाते हैं, जबकि भ्रष्ट आदर्श जीवन को कष्टों की ओर ले जाते हैं। इसलिए व्यक्ति नहीं, उसके चरित्र को अपना आदर्श बनाइए।" ॥ जय श्री राधा माधव ॥ 🙏🏻 || श्री गुरु चरणं | श्री कृष्ण शरणम् ||

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