
Rama Devi Sahu
3 days ago
*🌞~ वैदिक हिन्दू पंचांग ~🌞* *⛅दिनांक - 23 अक्टूबर 2026* *⛅दिन - शुक्रवार* *⛅विक्रम संवत् - 2083* *⛅अयन - दक्षिणायण* *⛅ऋतु - हेमंत* *⛅मास - आश्विन* *⛅पक्ष - शुक्ल* *⛅तिथि - द्वादशी दोपहर 02:35 तक तत्पश्चात् त्रयोदशी* *⛅नक्षत्र - पूर्वभाद्रपद रात्रि 09:03 तक तत्पश्चात् उत्तर भाद्रपद* *⛅योग - ध्रुव रात्रि 10:08 तक तत्पश्चात् व्याघात* *⛅राहुकाल - सुबह 10:45 से दोपहर 12:11 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅सूर्योदय - 06:27* *⛅सूर्यास्त - 05:55 (सूर्योदय एवं सूर्यास्त उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅दिशा शूल - पश्चिम दिशा में* *⛅ब्रह्ममुहूर्त - प्रातः 04:47 से प्रातः 05:37 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅अभिजीत मुहूर्त - सुबह 11:48 से दोपहर 12:34 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅निशिता मुहूर्त - रात्रि 11:46 से मध्यरात्रि 12:36 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *🌥️व्रत पर्व विवरण - प्रदोषव्रत* *🌥️विशेष - द्वादशी को पूतिका (पोई) खाने से पुत्र का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)* *(शरद पूर्णिमा : 25 अक्टूबर)* 🙏🏻 *आश्विन पूर्णिमा को ‘शरद पूर्णिमा’ बोलते हैं । इस दिन रास-उत्सव और कोजागर व्रत किया जाता है । गोपियों को शरद पूर्णिमा की रात्रि में भगवान श्रीकृष्ण ने बंसी बजाकर अपने पास बुलाया और ईश्वरीय अमृत का पान कराया था । अतः शरद पूर्णिमा की रात्रि का विशेष महत्त्व है ।* 🌙🌙 *इस रात को चन्द्रमा अपनी पूर्ण कलाओं के साथ पृथ्वी पर शीतलता, पोषक शक्ति एवं शांतिरूपी अमृतवर्षा करता है ।* 👉🏻 *शरद पूनम की रात को क्या करें, क्या न करें ? दशहरे से शरद पूनम तक चन्द्रमा की चाँदनी में विशेष हितकारी रस, हितकारी किरणें होती हैं । इन दिनों चन्द्रमा की चाँदनी का लाभ उठाना, जिससे वर्षभर आप स्वस्थ और प्रसन्न रहें ।* 👀👀 *नेत्रज्योति बढ़ाने के लिए दशहरे से शरद पूर्णिमा तक प्रतिदिन रात्रि में 15 से 20 मिनट तक चन्द्रमा के ऊपर त्राटक करें ।* 🙏🏻 *अश्विनी कुमार देवताओं के वैद्य हैं । जो भी इन्द्रियाँ शिथिल हो गयी हों, उनको पुष्ट करने केलिए चन्द्रमा की चाँदनी में खीर रखना और भगवान को भोग लगाकर अश्विनी कुमारों से प्रार्थना करना कि ‘हमारी इन्द्रियों का बल-ओज बढ़ायें ।’ फिर वह खीर खा लेना ।* 🙏🏻👉🏻🌚 *इस रात सूई में धागा पिरोने का अभ्यास करने से नेत्रज्योति बढ़ती है ।* *शरद पूनम दमे की बीमारीवालों के लिए वरदान का दिन है । अपने आश्रमों में निःशुल्क औषधि मिलती है, वह चन्द्रमा की चाँदनी में रखी हुई खीर में मिलाकर खा लेना और रात को सोना नहीं । दमे का दम निकल जायेगा ।* 🙏🏻🌙 *चन्द्रमा की चाँदनी गर्भवती महिला की नाभि पर पड़े तो गर्भ पुष्ट होता है । शरद पूनम की चाँदनी का अपना महत्त्व है लेकिन बारहों महीने चन्द्रमा की चाँदनी गर्भ को और औषधियों को पुष्ट करती है ।* 👉🏻 *अमावस्या और पूर्णिमा को चन्द्रमा के विशेष प्रभाव से समुद्र में ज्वार-भाटा आता है । जब चन्द्रमा इतने बड़े दिगम्बर समुद्र में उथल-पुथल कर विशेष कम्पायमान कर देता है तो हमारे शरीर में जो जलीय अंश है, सप्तधातुएँ हैं, सप्त रंग हैं, उन पर भी चन्द्रमा का प्रभाव पड़ता है ।* 👉🏻 *इन दिनों में अगर काम-विकार भोगा तो विकलांग संतान अथवा जानलेवा बीमारी हो जाती है और यदि उपवास, व्रत तथा सत्संग किया तो तन तंदुरुस्त, मन प्रसन्न और बुद्धि में बुद्धिदाता का प्रकाश आता है ।* 🙏🏻 *खीर को बनायें अमृतमय प्रसाद खीर को रसराज कहते हैं । सीताजी को अशोक वाटिका में रखा गया था । रावण के घर का क्या खायेंगी सीताजी ! तो इन्द्रदेव उन्हें खीर भेजते थे ।खीर बनाते समय घर में चाँदी का गिलास आदि जो बर्तन हो, आजकल जो मेटल (धातु) का बनाकर चाँदी के नाम से देते हैं वह नहीं, असली चाँदी के बर्तन अथवा असली सोना धो-धा के खीर में डाल दो तो उसमें रजतक्षार या सुवर्णक्षार आयेंगे । लोहे की कड़ाही अथवा पतीली में खीर बनाओ तो लौह तत्त्व भी उसमें आ जायेगा । इलायची, खजूर या छुहारा डाल सकते हो लेकिन बादाम, काजू, पिस्ता, चारोली ये रात को पचने में भारी पड़ेंगे ।* 🌑 *रात्रि 8 बजे महीन कपड़े से ढँककर चन्द्रमा की चाँदनी में रखी हुई खीर 11 बजे के आसपास भगवान को भोग लगा के प्रसादरूप में खा लेनी चाहिए । लेकिन देर रात को खाते हैं इसलिए थोड़ी कम खाना और खाने से पहले एकाध चम्मच मेरे हवाले भी कर देना । मुँह अपना खोलना और भाव करना : ‘लो महाराज ! आप भी लगाओ भोग ।’ और थोड़ी बच जाय तो फ्रिज में रख देना । सुबह गर्म करके खा सकते हो ।(खीर दूध, च
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