
Rama Devi Sahu
22 days ago
♦️ सबसे ऊँची भक्ति ......✍️ ♦️ एक लड़की ने, एक सन्त जी को बताया :-- कि मेरे पिता बहुत बीमार हैं और वे अपने पलंग से उठ भी नहीं सकते क्या आप उनसे मिलने हमारे घर पर आ सकते हैं। ♦️ सन्त जी ने कहा :-- बेटी मैं ज़रूर आऊँगा, जब सन्त जी उनसे मिलने आये तो देखा कि एक बीमार और लाचार आदमी पलंग पर दो तकियों पर सिर रखकर लेटा हुआ है। ♦️ लेकिन एक खाली कुर्सी उसके पलंग के सामने रखी हुई थी। ♦️ सन्त जी ने उस बूढ़े और बीमार आदमी से पूछा :-- कि मुझे लगता है कि शायद आप मेरे ही आने का इंतजार कर रहे थे। ♦️ उस वृद्ध आदमी ने कहा :-- जी नहीं, आप कौन हैं ? मैं आपको नहीं जानता। ♦️ सन्त जी ने अपना परिचय दिया और फिर कहा :-- मुझे ये खाली कुर्सी देखकर लगा कि आप को मेरे आने का आभास पहले से ही हो गया था। ♦️ वो आदमी बोला :-- सन्त जी, अगर आपको बुरा न लगे तो कृपया कमरे का दरवाज़ा बंद कर दीजिये। संत जी को थोड़ी हैरानी तो हुई, फिर भी सन्त जी ने दरवाज़ा बंद कर दिया। ♦️ वो बीमार आदमी बोला :-- कि दरअसल इस खाली कुर्सी का राज़ मैंने आजतक भी किसी को नहीं बताया। अपनी बेटी को भी नहीं बताया। दरअसल अपनी पूरी ज़िंदगी में मैं ये जान नहीं सका कि प्रार्थना कैसे की जाती है। लेकिन मैं हर रोज मंदिर जाता ज़रूर था लेकिन मुझे कुछ समझ नहीं आता था। ♦️ लगभग चार साल पहले मेरा एक दोस्त मुझे मिलने आया, उसने मुझे बताया.. कि हर प्रार्थना भगवान से हम सीधे ही कर सकते है। उसी ने मुझे सलाह दी कि एक खाली कुर्सी अपने सामने रखो और ये विश्वास करो कि भगवान खुद इस कुर्सी पर तुम्हारे सामने बैठे हैं, फिर भगवान से ठीक वैसे ही बातें करना शुरू करो, जैसे कि अभी तुम मुझसे कर रहे हो, वो हमारी हर फरियाद सुनता है, और जब मैंने ऐसा ही करके देखा मुझे बहुत अच्छा लगा। फिर तो मैं रोज़ दो-दो घंटे तक ऐसे ही भगवान से बातें करता हूं। ♦️ लेकिन मैं इस बात का ख़ास ध्यान रखता था, कि मेरी बेटी कभी मुझे ऐसा करते न देख ले। अगर वो देख लेती तो उसे लगता कि मैं पागल हो गया हूँ। ♦️ ये सुनकर सन्त जी की आँखों में, प्रेम और भाव से आँसू बहने लगे, सन्त जी ने उस बुजुर्ग से कहा कि आप सबसे ऊँची भक्ति कर रहे हो, फिर उस बीमार आदमी के सिर पर पर हाथ रखा और कहा अपनी सच्ची प्रेम भक्ति को ज़ारी रखो। ♦️ सन्त जी, अपने आश्रम में लौट गये, लेकिन पाँच दिन बाद वही बेटी सन्त जी से मिलने आई और उन्हें बताया कि जिस दिन आप मेरे पिता जी से मिले थे, वो बेहद खुश थे, लेकिन कल सुबह चार बजे मेरे पिता जी ने प्राण त्याग दिये हैं। ♦️ बेटी ने बताया, कि मैं जब घर से अपने काम पर जा रही थी तो उन्होंने मुझे बुलाया और मेरा माथा प्यार से चूमा, उनके चेहरे पर बहुत शांति थी, उनकी आँखे आँसुओं से भरी हुई थीं, लेकिन वापिस लौटकर मैंने एक अजीब सी चीज़ भी देखी वो ऐसी मुद्रा में अपने बिस्तर पर बैठे थे जैसे खाली कुर्सी पर उन्होंने ने किसी की गोद में अपना सिर झुका रखा हो, जबकि कुर्सी तो हमेशा की तरह ख़ाली थी। ♦️ सन्त जी, मेरे पिता जी ने ख़ाली कुर्सी के आगे सिर क्यों झुका रखा था? ♦️ बेटी से पिता का ये हाल सुन कर सन्त जी फूटफूट कर रोने लगे और मालिक के आगे फरियाद करने लगे.. हे मालिक! मैं भी, जब इस दुनिया से जाऊं तो ऐसे ही जाऊं, मुझ पर भी ऐसी ही कृपा करना। 🙏🌹राधे राधे जी🌹 🙏
Comments (10)

Rama Devi Sahu
Aug 9, 2026
🙏‼️ Radhey Radhey ❤️ Jai Shree Krishna 🌹 Shubha Dopahar ki Shubh Kamnaye ❤️ 🙏

Rama Devi Sahu
Aug 9, 2026
Ji Shukriya 🌹 Aastha hai tho Bhagwan Jarur Milne Ayenge....ye Vishwas Apne Upar 100% Hona Chahiye.... Mere Bhagwan Mare Pass hai...! Radhey Radhey Jii 🌹🌹

Rama Devi Sahu
Aug 9, 2026
🌹🌹 Good Afternoon 🌞 Radhey Radhey ❤️ Jai Shree Krishna 🌹🌹

Sanju ❤️
Aug 9, 2026
dil bhut khus ho gya Radhe Radhe ji 🙏 hum b ese hi koshish kar rahe h pehle se hi jai Shri Krishna 🙏 bhut badiya ese hi post dala karo ji 😊😊

Sanju ❤️
Aug 9, 2026
jai Shri Krishna Radhe Radhe 🙏

Rama Devi Sahu
Aug 8, 2026
जीवन की हर उलझन का एक ही सार है जहाँ कुछ समझ न आए, वहाँ कृष्ण का हाथ थाम लो क्योंकि जो कन्हैया के भरोसे चलते हैं उनकी नैया कभी नहीं डूबती ┈•••✤ राधे राधे ✤•••┈ शुभ रात्रि वंदन जी 🙏

Rama Devi Sahu
Aug 8, 2026
जीवन की हर उलझन का एक ही सार है जहाँ कुछ समझ न आए, वहाँ कृष्ण का हाथ थाम लो क्योंकि जो कन्हैया के भरोसे चलते हैं उनकी नैया कभी नहीं डूबती ┈•••✤ राधे राधे ✤•••┈ शुभ रात्रि वंदन जी 🌹

R k jangid phulera Jaipur
Aug 8, 2026
जय श्री राधे कृष्णा शुभ रात्रि बहन

R k jangid phulera Jaipur
Aug 8, 2026
जय श्री राधे कृष्णा शुभ रात्रि ऑन

बरखा शर्मा
Aug 8, 2026
jay shree radhe krishn ji 🙏💐
