
प्रशांत कुमार मिश्रा
20 days ago
रामचरित :उत्तरकाण्ड;दोहा ३१.बरनाश्रम निज निज धरम निरत बेद पथ लोग | चलहिं सदा पावहिं सुखहि नहिं भय सोक न रोग || अर्थात् तुलसीदासजी कहते हैं कि श्रीरामचन्द्रजी के राज्य में सब लोग अपने- अपने वर्ण और आश्रम के अनुकूल धर्म में तत्पर रहते हुए सदा वेद- मार्ग पर चलते हैं और सुख पाते हैं | उन्हें न किसी बात का भय है , न शोक है और न कोई रोग ही सताता है | तात्पर्य यह है कि जब हम अपने वर्ण और आश्रम के अनुकूल धर्माचरण करते हुए वेदमार्ग पर चलते हैं तो जीवन में सुख की प्राप्ति होती है और हमें किसी प्रकार का भय , शोक या कोई रोग नहीं रहता है | जय जय सीताराम |
Comments (1)

Rama Devi Sahu
Aug 25, 2026
🙏🏹 Jai Shree Ram 🙏 Jai Siya Ram 🏹🙏
