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*भरथरी लोकगीत– विरक्ति और लोकचेतना की गाथा🕉️* भरथरी लोकगीत एक राजा के त्याग, वैराग्य और आध्यात्मिक यात्रा पर आधारित गाथा है, जो छत्तीसगढ़ में पीढ़ियों से गाई जाती है। कथा कहती है कि राज सत्ता और भोग के शिखर पर पहुंचकर भी अंततः वैराग्य का मार्ग अपनाया और और योगी बन गए। मांदर, सारंगी या एकतारा के धुन पर गाए जाने वाले ये गीत केवल कथा नहीं, जीवन की अनित्यता का स्मरण कराते है। लोकगायक भरथरी की पीड़ा, प्रश्न और आत्मबोध को स्वर देते है। यह लोकगीत बताता है कि राजा भी जब सत्य की खोज करता है, तो साधक बन जाता है। *मेरी संस्कृति…मेरा देश…मेरा अभिमान 🚩*

Comments (2)

Srikumar  महाराज🇮🇳☸️

Srikumar महाराज🇮🇳☸️

Feb 27, 2026

राधे-राधे नहीं मैं भारत से हूं धन्यवाद 🙏

Swapnil Verma

Swapnil Verma

Feb 27, 2026

राधे राधे भैया जी आप छत्तीसगढ़ के हैं क्या