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धरती के उल्लास का स्वर- *राग बसन्त* 🎵 वसन्ती हवा… फूलों की महक… कोयल की कूक... पलाश के रंग... फाग का उल्लास... ये सब ऋतुराज वसन्त के अनुचर हैं। और इसके सौन्दर्यगान का राग है - *राग बसन्त!* 🎵 वसन्त ऋतु में गाया जाने वाला राग हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत परम्परा के पूर्वी थाट का है। इसकी जाति औडव‑संपूर्ण है। इसके आरोह में पाँच, तथा अवरोह में सात स्वर होते हैं। इसका वादी स्वर 'सा' तथा संवादी स्वर 'प' है। 🎵 शृंगार का यह राग श्रोता-मन में प्रकृति के वासन्ती उत्सव व उल्लास का दृश्य जगा देता है। होली पर गाई जाने वाली बंदिशें तो इसकी विशेषता है। 🎵आइये हम सब मिलकर पं. भीमसेन जोशी द्वारा इस राग में गाए गए एक प्रसिद्ध गीत- 'केतकी गुलाब जूही' के साथ ऋतुराज वसन्त का स्वागत करें! *मेरी संस्कृति…मेरा देश…मेरा अभिमान 🚩*

Comments (2)

Rama Devi Sahu

Rama Devi Sahu

Feb 22, 2026

Vasant Ritu or Subah ki Swasth Bata varan ke Sath Surya ki pehli kiran Aap ke liye Dher Saari Khushiyan le kr Aaye 🙏 Aap ka Din Subha Mangalmay Ho 🙏 Suprabhat Jii 🙏🌹🌹