
Rama Devi Sahu
146 days ago
🙏रामचरितमानस में नवधा भक्ति (अरण्यकांड चौपाई):🚩 ➡प्रथम भगति संतन कर संगा: संतों (सज्जनों) का सत्संग पहली भक्ति है। ➡दूसरी रति मम कथा प्रसंगा: भगवान के कथा-प्रसंग में प्रेम होना दूसरी भक्ति है। ➡गुरु पद पंकज सेवा तीसरी भगति अमान: अभिमान रहित होकर गुरु के चरणों की सेवा करना तीसरी भक्ति है। ➡चौथी भगति मम गुन गन करइ कपट तजि गान: कपट छोड़कर भगवान के गुणों का गान करना चौथी भक्ति है। ➡मंत्र जाप मम दृढ़ विश्वासा, पंचम भजन सो वेद प्रकासा: वेदों में बताए अनुसार मंत्र जाप और भगवान में दृढ़ विश्वास होना पांचवीं भक्ति है। ➡छठ दम सील बिरति बहु करमा, निरत निरंतर सज्जन धरमा: इन्द्रियों का निग्रह (दम), शील (सज्जनता), वैराग्य और निरंतर सज्जनों के धर्म में लगे रहना छठी भक्ति है। ➡सातवीं भगति मोहि जग देखई, संत अधिक करि लिखई: पूरे जगत को राममय देखना और संतों को ईश्वर से भी अधिक मानना सातवीं भक्ति है। ➡आठवीं भगति जथा लाभ संतोष, सपनहुँ नहिं देखइ परदोष: जो कुछ मिल जाए उसमें संतोष करना और सपने में भी दूसरों के दोष न देखना आठवीं भक्ति है। ➡नवम सरल सब सन छलहीना, मम भरोस हिय हरष न दीना: सबके साथ निष्कपट और सरल व्यवहार करना, तथा हृदय में भगवान पर भरोसा रखना (दुःख न मानना) नवीं भक्ति है

Comments (2)

Rama Devi Sahu
Apr 7, 2026
मंगलवार सुबह की राम राम जी 🙏🙏 प्रभू श्री राम जी की कृपा आप सभी भक्तो पर हमेशा बनी रहे 🌷🌷

LALAN KUMAR
Apr 7, 2026
*हरे राम हरे राम* *राम राम हरे हरे* *जय श्री राम जी*
